एकता दिवस : सरदार पटेलांचा वारसा आणि राष्ट्रीय एकात्मतेचे आव्हान

राज माहोरे पत्रकार ✍️  राष्ट्रीय एकता ही केवळ नकाशावर सीमा आखून सुरक्षित होत नाही, तर विविध क्षेत्रांतील लोकांमध्ये सामायिक सामाजिक-राजकीय जाणिवेवर अवलंबून असते. स्वातंत्र्यप्राप्तीनंतर प्रादेशिक आकांक्षा आणि बदलत्या सामाजिक अपेक्षांच्या…

दिवाली के दीये जलेंगे, लेकिन सूखे खेतों का अंधेरा कौन मिटाएगा?

दिवाली यानी खुशियों का त्योहार। घरों में साफ-सफाई, बाजारों में रौनक, मिठाइयों की खुशबू और शाम होते ही दीयों की जगमगाहट। हर कोई चाहता है कि इस दिवाली उसका घर…

बदलते मौसम का बढ़ता संकट : किसान और आम आदमी कब तक भुगतेंगे कीमत?

मौसम का बदलता मिजाज अब सिर्फ छाता निकालने या गर्मी से बचने का मामला नहीं रह गया है। यह किसानों की मेहनत, आम आदमी की रसोई और आने वाले कल…

लोकशाहीचा आवाज दडपून मतांचा विश्वास जिंकता येईल का?

राज माहोरे ✍️ लोकशाहीमध्ये सत्ताधाऱ्यांना प्रश्न विचारले जातात, संस्थांच्या कामकाजावर टीका होते आणि निर्णयांना आव्हान दिले जाते. या प्रक्रियेतूनच लोकशाही अधिक सक्षम बनते. मात्र, जेव्हा निवडणूक प्रक्रियेच्या निष्पक्षतेविषयी प्रश्न उपस्थित…

घर में सब साथ हैं, फिर भी हर कोई अकेला क्यों है?

कभी घर लौटते ही मां की आवाज सुनाई देती थी, “आ गए बेटा? चलो, पहले बैठो, कुछ खा लो।” पापा दिनभर की बातें पूछते थे, भाई-बहन छोटी-छोटी बातों पर लड़ते…

हर जगह कैमरा है, फिर भी यादें कम क्यों हो रही हैं?

आज हमारे आसपास कैमरे ही कैमरे हैं। मोबाइल निकालिए और कुछ ही सेकंड में किसी भी पल की तस्वीर या वीडियो तैयार। जन्मदिन हो, दोस्तों के साथ मुलाकात हो, परिवार…

आता निर्णय तरुणांनीच घ्यायचा आहे!

-राज माहोरे ✍️ तरुणांनी राजकारणात यावे पण कुणाच्या सावलीत उभे राहण्यासाठी नव्हे; स्वतःची सावली निर्माण करण्यासाठी! मोठ्या नेत्यांसोबत फोटो काढण्यापेक्षा एखाद्या बेरोजगार तरुणाच्या हाताला काम द्या. सोशल मीडियावर स्वतःच्या नावाचा…

दुष्काल सिर्फ खेत में पड़ता है क्या?

बारिश का मौसम खत्म होने की ओर है, लेकिन महाराष्ट्र के कई इलाकों में किसानों की चिंता खत्म नहीं हुई है। कहीं बारिश में लंबा अंतर आया, कहीं फसल को…

त्योहार खत्म होते ही सड़कों पर कचरा क्यों छोड़ जाते हैं हम?

त्योहार आते हैं तो शहर बदल जाता है। सड़कों पर रोशनी दिखाई देती है, बाजारों में रौनक बढ़ जाती है, घरों और सार्वजनिक स्थानों पर सजावट होती है। लोग परिवार…

गणपति बप्पा आए… अब हमारी जिम्मेदारी कहाँ है?

गणपति बप्पा के आगमन के साथ ही शहर का माहौल बदल जाता है। घरों में पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं, बाजारों में रौनक बढ़ जाती है और गलियों…