नई दिल्ली : पहाड़ों की ऊंचाइयों के बीच बसे धार्मिक स्थलों तक पहुंचना अब पहले से आसान होने वाला है। उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में भारतीय रेलवे एक ऐसे रेल मार्ग का निर्माण कर रही है, जो न सिर्फ इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण होगा, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं के सफर को भी आसान बना सकता है। ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक बन रहे इस 125 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग की सबसे खास बात यह है कि इसका लगभग 83 प्रतिशत हिस्सा यानी करीब 103 किलोमीटर सुरंगों से होकर गुजरेगा।
इस परियोजना में 12 रेलवे स्टेशन और 19 पुल बनाए जा रहे हैं। पहाड़ों के बीच रेल लाइन बिछाना आसान नहीं है, लेकिन इस परियोजना के पूरा होने के बाद उत्तराखंड की कनेक्टिविटी को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
पूरे दिन का सफर, अब महज दो घंटे में!
फिलहाल ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक पहुंचने में यात्रियों को सड़क मार्ग से लंबा सफर तय करना पड़ता है। पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन, खराब मौसम और संकरी सड़कों के कारण यात्रा कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाती है। ऐसे में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना यात्रियों के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकती है। परियोजना पूरी होने के बाद ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक का सफर लगभग दो घंटे में पूरा होने की उम्मीद है। इसका सबसे बड़ा फायदा उन श्रद्धालुओं को मिलेगा, जो केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा के लिए उत्तराखंड पहुंचते हैं। हालांकि, इन धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए आगे सड़क मार्ग और अन्य साधनों की जरूरत बनी रहेगी।
5 जिलों से होकर गुजरेगी रेल लाइन
यह रेल मार्ग उत्तराखंड के पांच जिलों देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली से होकर गुजरेगा। इसके जरिए ऋषिकेश को देवप्रयाग और कर्णप्रयाग से सीधे रेल संपर्क मिलेगा।
परियोजना के तहत बनने वाले 12 रेलवे स्टेशन हैं—
ऋषिकेश, शिवपुरी, बयासी, देवप्रयाग, जनासू, मलेथा, श्रीनगर, धारी देवी, तिलानी, घोलतीर, गौचर और कर्णप्रयाग। इन स्टेशनों के माध्यम से पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों को आवागमन का एक नया विकल्प मिलेगा। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को भी फायदा हो सकता है।
19 पुल, 103 किलोमीटर सुरंगें और कठिन पहाड़ी चुनौती
हिमालय के ऊबड़-खाबड़ भूभाग में रेल मार्ग तैयार करना अपने आप में बड़ी चुनौती है। इसी वजह से इस परियोजना में बड़ी संख्या में सुरंगों और पुलों का निर्माण किया जा रहा है। नदियों और गहरी घाटियों को पार करने के लिए कुल 19 पुल बनाए जा रहे हैं। इनमें से 11 पुलों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि बाकी पुलों पर काम जारी है। रेलवे इस पूरे मार्ग पर फूलों के पौधे लगाने की योजना भी बना रही है, जिससे पहाड़ों के बीच से गुजरने वाला यह रेल मार्ग प्राकृतिक सुंदरता से भी भरपूर नजर आए।
श्रद्धालुओं के लिए आसान होगा सफर, पहाड़ों को मिलेगी नई रफ्तार
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना सिर्फ एक रेल लाइन नहीं, बल्कि उत्तराखंड के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। इससे स्थानीय लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलने के साथ पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा मिल सकता है। चारधाम यात्रा के दौरान हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं। ऐसे में बेहतर रेल कनेक्टिविटी से यात्रियों का समय बच सकता है और पहाड़ी क्षेत्रों तक पहुंचना अधिक सुविधाजनक हो सकता है। अब सभी की नजरें इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने पर हैं। उम्मीद है कि आने वाले समय में हिमालय की कठिन राहों पर रेल की यह नई पटरी श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के सफर को पहले से कहीं अधिक आसान बनाएगी।


