महाराष्ट्र में सूखे की मार झेल रहे किसानों के लिए राज्य सरकार ने मदद का भरोसा दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि संकट की इस घड़ी में सरकार किसानों को अकेला नहीं छोड़ेगी। सूखे से प्रभावित किसानों को ₹5,000 की अग्रिम सहायता देने के साथ ही पीने के पानी, पशुओं के चारे और कृषि कर्ज से जुड़े मुद्दों पर भी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। मुंबई के सह्याद्री अतिथिगृह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में अखिल भारतीय किसान सभा की विभिन्न मांगों को लेकर बैठक हुई। इस दौरान किसानों की आर्थिक परेशानियों, कृषि योजनाओं और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।
सूखे से प्रभावित किसानों को ₹5,000 की अग्रिम सहायता
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि राज्य में सूखे की स्थिति से निपटने के लिए सरकार हरसंभव मदद कर रही है। सूखे से नुकसान झेलने वाले किसानों को ₹5,000 की अग्रिम सहायता दी जाएगी। इस सहायता से किसानों को राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) के निर्धारित मानकों से अधिक मदद मिलने की बात कही गई है। इसके अलावा, सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पीने के पानी के टैंकर शुरू करने और पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी जाएगी। आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों को राहत पहुंचाने के लिए प्रभावित उपसा सिंचाई योजनाओं के कर्ज माफ करने के फैसले को भी प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए।
फसल कर्ज और कर्जमाफी पर भी चर्चा
बैठक में किसानों को नए फसल कर्ज देने के दौरान CIBIL स्कोर की शर्त का मुद्दा भी उठा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से सभी बैंकों को पत्र भेजा जाएगा, ताकि नए कृषि कर्ज के लिए CIBIL की शर्त नहीं रखे जाने के मुद्दे पर कार्रवाई की जा सके। नियमित रूप से फसल कर्ज चुकाने वाले किसानों को सरकार की ओर से ₹50,000 का प्रोत्साहन अनुदान दिया जा रहा है। इस राशि में बढ़ोतरी की मांग पर कर्जमाफी के लिए गठित मंत्रियों का समूह चर्चा करेगा। राज्य की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेने की बात कही गई। इसके साथ ही नमो शेतकरी महासम्मान निधि योजना की किस्तें किसानों तक पहुंचाने का मुद्दा भी बैठक में उठाया गया।
लाडकी बहिण योजना की लंबित किस्तों पर निर्देश
बैठक में महिलाओं से जुड़ी योजनाओं पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना के तहत ई-केवाईसी पूरी कर चुकी महिलाओं की लंबित किस्तें जल्द जारी की जाएं। वहीं, नए लाभार्थियों और आदिवासी क्षेत्रों की उन महिलाओं के मामलों पर भी सरकार सकारात्मक रूप से विचार करेगी, जिनकी ई-केवाईसी पूरी नहीं हुई है।
फसल बीमा और आदिवासी उत्पादों पर भी ध्यान
किसानों को फसल बीमा का लाभ दिलाने के लिए पहले लागू किए गए ट्रिगर दोबारा शुरू करने के मुद्दे की संबंधित विभाग से जांच कराई जाएगी। इसके बाद उचित निर्णय लिया जाएगा। इसके अलावा, आदिवासी क्षेत्रों में उत्पादित बाळ हिरड़ा की खरीद आदिवासी विकास महामंडल के माध्यम से पहले की तरह शुरू करने के निर्देश दिए गए। इस उत्पाद को न्यूनतम समर्थन मूल्य में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार के पास भी मुद्दा उठाया जाएगा।
ग्रामीण कर्मचारियों और निर्माण श्रमिकों के मुद्दे भी उठे
बैठक में शालेय पोषण आहार कर्मचारियों के मासिक मानधन में ₹1,000 की बढ़ोतरी करने के प्रस्ताव पर सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया। फिलहाल इन कर्मचारियों को ₹2,500 प्रतिमाह मानधन मिलता है। इसके अलावा, पेसा गांवों में काम करने वाली मोबिलाइजर महिलाओं का मानधन सीधे उनके बैंक खातों में जमा करने और ग्राम रोजगार सेवकों का मानधन ग्राम पंचायत के बजाय उनके व्यक्तिगत बैंक खातों में जमा करने के मुद्दों पर संबंधित विभागों को जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। निर्माण श्रमिकों के लिए व्यक्तिगत लाभ की योजनाओं का स्वरूप तय करने और चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति योजना शुरू करने पर भी सरकार ने सकारात्मक विचार करने की बात कही।
कृषि बिजली कनेक्शन और सौर पंपों की शिकायतों की जांच
वर्धा जिले में कृषि पंपों के बिजली कनेक्शन के लिए मांगपत्र भरने के बावजूद कनेक्शन नहीं मिलने वाले किसानों की समस्याओं की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। वहीं, सौर ऊर्जा आधारित कृषि पंपों को लेकर किसानों की शिकायतों की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट पेश करने को भी कहा गया।
किसानों को राहत मिलने की उम्मीद
सूखे के कारण खेती, पशुपालन और रोजमर्रा के खर्चों का दबाव झेल रहे किसानों के लिए सरकारी सहायता की घोषणा महत्वपूर्ण है। हालांकि, किसानों को वास्तविक राहत तब मिलेगी, जब घोषित सहायता समय पर उनके खातों तक पहुंचेगी और पानी, चारे, कर्ज तथा कृषि सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का समाधान जमीन पर दिखाई देगा। मुख्यमंत्री फडणवीस ने भरोसा दिलाया कि सरकार किसानों को संकट में अकेला नहीं छोड़ेगी। अब किसानों की नजर इस बात पर रहेगी कि बैठक में लिए गए फैसलों और दिए गए निर्देशों पर कितनी तेजी से अमल होता है।


