रात को सोने से पहले अन्वी हमेशा अपने कमरे की लाइट बंद कर देती थी। लेकिन पिछले कुछ दिनों से उसे एक अजीब-सी बात महसूस हो रही थी।
जब भी वह कमरे की लाइट बंद करती, उसकी परछाई दीवार पर कुछ अलग ही करती दिखाई देती।
कभी वह हाथ हिलाती, कभी सिर झुकाती, तो कभी ऐसा लगता जैसे वह अन्वी को कुछ बताना चाहती हो।
अन्वी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर यह हो क्या रहा है।
एक रात उसने अचानक कमरे की लाइट जलाई।
दीवार बिल्कुल खाली थी।
उसने लाइट बंद की।
परछाई फिर दिखाई दी।
इस बार अन्वी ने हिम्मत करके पूछा, “तुम मुझसे क्या छुपा रही हो?”
कमरे में सन्नाटा था।
अगली सुबह अन्वी ने एक नया प्रयोग किया। वह दिनभर अपनी परछाई को ध्यान से देखने लगी।
जब वह हँसती, परछाई भी हँसती। जब वह दौड़ती, परछाई भी दौड़ती।
लेकिन जब अन्वी उदास होकर बैठती, तो उसकी परछाई बिल्कुल शांत हो जाती।
उस दिन अन्वी की सबसे अच्छी दोस्त रिया उससे नाराज थी। दोनों के बीच छोटी-सी बात पर झगड़ा हो गया था।
अन्वी घर आई और चुपचाप बैठ गई।
शाम को उसने दीवार पर अपनी परछाई देखी।
इस बार परछाई ने अपना हाथ आगे बढ़ाया हुआ था।
अन्वी ने भी हाथ आगे बढ़ाया।
दोनों के हाथ दीवार पर एक-दूसरे से मिल गए।
अन्वी अचानक मुस्कुरा दी।
उसे लगा जैसे उसकी परछाई कह रही हो—
“तुम जब किसी से नाराज होती हो, तो तुम्हारे भीतर का उजाला भी थोड़ा कम हो जाता है।”
अगले दिन अन्वी रिया के पास गई।
“मुझे माफ कर दो।”
रिया मुस्कुराई और दोनों फिर से दोस्त बन गईं।
उस रात अन्वी ने कमरे की लाइट बंद की।
दीवार पर उसकी परछाई बिल्कुल सामान्य थी।
लेकिन अन्वी अब जानती थी कि उसकी परछाई कोई रहस्य नहीं छुपा रही थी।
वह तो बस उसे उसके अपने मन की बातें समझा रही थी।
और उस दिन से अन्वी ने एक नई आदत बना ली।
जब भी वह उदास होती, वह अपनी परछाई को देखकर खुद से पूछती—
“आज मेरे मन में कौन-सी बात छुपी हुई है?”
क्योंकि कभी-कभी खुद को समझने के लिए हमें किसी दूसरे की नहीं, अपने ही मन की आवाज सुनने की जरूरत होती है।
कहानी से सीख
हर भावना को समझना जरूरी है। गुस्सा, उदासी और नाराजगी भी हमें अपने बारे में कुछ सिखाती हैं।


