भारत के कपड़ा, चमड़ा और जूता उद्योग के लिए खुलेंगे बड़े बाजार, पीयूष गोयल को उम्मीद

मुक्त व्यापार समझौतों से बढ़ेंगे निर्यात के अवसर; रोजगार बढ़ने के साथ MSME क्षेत्र को भी मिलेगा फायदा

द हेग : भारत के कपड़ा, चमड़ा और जूता उद्योग के साथ-साथ कृषि, मत्स्य पालन और ऑटो कलपुर्जे बनाने वाले उद्योगों के लिए आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजारों के नए रास्ते खुल सकते हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का मानना है कि भारत के विभिन्न देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से भारतीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। इसका सीधा फायदा रोजगार देने वाले उद्योगों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को मिल सकता है।

बर्लिन, एम्स्टर्डम और द हेग के दौरे के बाद गोयल ने कहा कि इन समझौतों से भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। ऐसे समय में, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण दुनिया भर में कामकाज के तरीकों में बदलाव आ रहा है, भारत के लिए रोजगार आधारित उद्योगों को मजबूत करना महत्वपूर्ण है।

रोजगार बढ़ाने में मददगार होंगे व्यापार समझौते

भारत में कपड़ा, चमड़ा, जूते, कृषि उत्पाद और मत्स्य उत्पाद बनाने वाले कई उद्योग बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार देते हैं। इन उद्योगों के उत्पादों को विदेशी बाजारों में बेहतर अवसर मिलते हैं, तो इसका लाभ केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छोटे कारोबारियों और स्थानीय स्तर पर काम करने वाले लोगों तक भी पहुंच सकता है।

पीयूष गोयल के अनुसार, विकसित देशों ने पहले रोजगार आधारित कई उत्पादों पर भारी शुल्क लगाए थे। अब मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से भारतीय उत्पादों को इन बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने का बेहतर अवसर मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दो से तीन वर्ष तकनीक के लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे। आधुनिक तकनीक और नए क्षेत्रों में भारत में बड़े निवेश की संभावनाएं हैं। इससे कुशल और प्रतिभाशाली युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।

चीन और आसियान देशों में बढ़ सकता है भारतीय निर्यात

भारत अब चीन और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान के बाजारों में भी अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। गोयल के मुताबिक, भारत दूसरे देशों के साथ पारस्परिक आधार पर मुक्त और निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देना चाहता है। चीन से भारत को कई महत्वपूर्ण कच्चे माल और मध्यवर्ती उत्पाद मिलते हैं। हालांकि, किसी उत्पाद की कीमत में अनुचित व्यापारिक गतिविधि सामने आने पर उसके खिलाफ निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। भारत का प्रयास है कि दूसरे देशों में भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के लिए बाजार के अधिक अवसर उपलब्ध हों। इससे भविष्य में चीन और आसियान देशों को भारत का निर्यात बढ़ने की संभावना है।

भारत-चीन व्यापार में बढ़ोतरी, लेकिन व्यापार घाटा भी बड़ी चुनौती

भारत और चीन के बीच व्यापारिक संबंधों में सुधार की कोशिशें जारी हैं। गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा था, लेकिन हाल के महीनों में संबंध बेहतर बनाने के लिए कदम उठाए गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 7.9 प्रतिशत बढ़कर 127.7 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इस दौरान चीन को भारत का निर्यात 36.62 प्रतिशत बढ़कर 19.47 अरब डॉलर रहा। हालांकि, चीन से भारत का आयात 131.62 अरब डॉलर बताया गया है। इसके चलते दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा 99.19 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह स्थिति बताती है कि भारत के सामने निर्यात बढ़ाने के साथ-साथ आयात और निर्यात के बीच संतुलन बनाने की चुनौती भी है।

मेट्रो और सुरंग परियोजनाओं पर भी नजर

चीन ने सुरंग बनाने वाली मशीनों सहित कुछ महत्वपूर्ण मशीनरी के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए हैं। इससे भारत में मेट्रो, हाई-स्पीड रेल और सुरंग निर्माण जैसी परियोजनाओं पर असर पड़ने की आशंका है। गोयल ने कहा कि भारत इस मुद्दे पर काम करेगा। देश में बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं के विस्तार के बीच जरूरी मशीनरी की उपलब्धता भी अहम है। ऐसे में भारत के लिए वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करना महत्वपूर्ण हो सकता है।

दक्षिण अफ्रीका के पांच देशों के साथ भी व्यापार वार्ता

भारत विभिन्न देशों और क्षेत्रीय समूहों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों को लेकर बातचीत कर रहा है। इसी क्रम में दक्षिण अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (SACU) के साथ भी व्यापार वार्ता आगे बढ़ रही है। इस संगठन में बोत्सवाना, इस्वातिनी, लेसोथो, नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। भारत और SACU ने अगस्त में तरजीही व्यापार समझौते के लिए औपचारिक बातचीत शुरू करने से जुड़ी शर्तें तय की थीं।

छोटे उद्योगों और युवाओं के लिए क्यों अहम है यह पहल?

मुक्त व्यापार समझौतों का वास्तविक लाभ तब दिखाई देगा, जब भारतीय कंपनियों को विदेशी बाजारों में अपने उत्पाद बेचने के अधिक अवसर मिलेंगे। इससे उत्पादन बढ़ने, छोटे उद्योगों को नए ग्राहक मिलने और रोजगार सृजन को गति मिलने की संभावना है। खासतौर पर कपड़ा, चमड़ा, जूते और कृषि आधारित उद्योगों में काम करने वाले लोगों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर बन सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक असर समझौतों की शर्तों, विदेशी बाजारों में मांग और भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर निर्भर करेगा।

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