श्रीक्षेत्र गुरुकुंज आश्रम ,राज माहोरे (प्रतिनिधि) : आज दुनिया में प्रकृति का तेजी से क्षरण हो रहा है और प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता जा रहा है। इसका अनुभव हम वर्तमान समय में कर रहे हैं। वैश्विक सर्वेक्षण के अनुसार, प्रकृति के संतुलन के मामले में 177 देशों में भारत 176वें स्थान पर है। राष्ट्रसंत श्री तुकडोजी महाराज ने एक बार सवाल उठाया था कि क्या मेरे इस साधन से समाज बदलेगा? इसलिए राष्ट्रसंत के विचारों का प्रभाव समाज परिवर्तन के लिए बढ़ाना है, तो नए साधनों का इस्तेमाल करना जरूरी है। यह प्रतिपादन पुणे के पशुसंवर्धन आयुक्त डॉ. सुनील लहाने ने किया। वे राष्ट्रसंत श्री तुकडोजी महाराज के 58वें पुण्यतिथि महोत्सव के दौरान सामुदायिक प्रार्थना पर आयोजित चिंतन सत्र में बोल रहे थे।
डॉ. लहाने ने कहा कि राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज के समय में विभिन्न मंडल, केंद्र और समितियां स्थापित की गई थीं। उसी तरह आज भी नए साधनों को अपनाकर विभिन्न मंडलों की स्थापना करनी चाहिए। नदी की सफाई, वृक्षारोपण, जल संरक्षण और पानी को रोकने व जमीन में उतारने जैसे रचनात्मक कार्यों के माध्यम से भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामुदायिक प्रार्थना परमेश्वर से संवाद करने का एक माध्यम है। कई लोग व्यक्तिगत सुख के लिए प्रार्थना करते हैं, लेकिन मानव शरीर के माध्यम से सेवा की जा सके, इसी उद्देश्य से राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज ने सामुदायिक प्रार्थना की प्रणाली शुरू की थी। सामुदायिक प्रार्थना में राष्ट्रसंत ने समय प्रबंधन और अनुशासन जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों को शामिल किया है। ये दोनों बातें मानव जीवन में बेहद मूल्यवान हैं। समय का सदुपयोग करना आवश्यक है, लेकिन मनुष्य धन, पद और प्रतिष्ठा के पीछे भागता रहता है।
‘हावऱ्या मना ऐकेना, मज गुरुभक्ती करु देना’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यही दुख का मूल है। हमें ऐसे सत्कर्म करने चाहिए, जिनसे किसी का मन दुखी न हो। ‘राजास जी महाली सौख्य कधी मिळाली, ते सर्व प्राप्त झाली या झोपडीत माझ्या’ इस पंक्ति का अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि धन, पद और प्रतिष्ठा से मनुष्य को वास्तविक संतुष्टि नहीं मिलती। सुख और संतोष मन की अनुभूति है।
डॉ. लहाने ने कहा कि राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज ने समाज को जीवन शिक्षा और जीवन कला का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि समाज को तत्वज्ञान बताने वाले संतों के अनुयायियों का समूह छोटा होता है, जबकि चमत्कार बताने वाले संतों के अनुयायियों की संख्या अधिक होती है। हालांकि, गुरुदेव भक्तों को इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए। हमारा समूह छोटा हो, तब भी हमें उस पर गर्व होना चाहिए। भविष्य में राष्ट्रसंत के विचार ही दुनिया को सही दिशा दिखाएंगे।
आज के कार्यक्रम
सामुदायिक ध्यान एवं चिंतन : अमोल बांबल
सुबह 7 से 8 बजे : योग एवं प्राणायाम
सुबह 8 से 9 बजे : गजानन सुरकार का ग्रामगीता प्रवचन
सुबह 9 से 10.30 बजे : उमेश्वर बारापात्रे का अभंग गायन
सुबह 10.30 से शाम 5 बजे : वारकरी कीर्तन सम्मेलन का उद्घाटन। अध्यक्ष लक्ष्मणदास काळे, उद्घाटक गुरुवर्य चंदेले नाना (आलंदी)
शाम 6 से 7 बजे : सामुदायिक प्रार्थना एवं चिंतन – डॉ. योगिता पिंजरकर
शाम 7.15 से 8.15 बजे : खंजिरी भजन – श्रीगुरुदेव भजन मंडल, हिरापुर
शाम 8.15 से 9.15 बजे : स्वरानुभवसागर भजनांजलि – प्रस्तुति अकोला आइडल, संयोजक प्रा. निलेश ढाकरे
रात 9.15 से 10.30 बजे : पंकज पोहोकार का कीर्तन


