भगवान पर भरोसा है, फिर भी मन अशांत क्यों है? सुकून की तलाश में भटकते मन को समझिए
कभी ऐसा हुआ है कि आपने मंदिर में बैठकर भगवान से अपने मन की बात कही हो, हाथ जोड़कर प्रार्थना की हो और फिर भी मन को सुकून न मिला…
कभी ऐसा हुआ है कि आपने मंदिर में बैठकर भगवान से अपने मन की बात कही हो, हाथ जोड़कर प्रार्थना की हो और फिर भी मन को सुकून न मिला…
