महंगाई की मार अब आम आदमी की रसोई तक पहुंच गई है। गेहूं, ज्वार, दाल और चावल की बढ़ती कीमतों ने घर का बजट बिगाड़ दिया है। रोजमर्रा के खाने में इस्तेमाल होने वाले अनाज और दालों के दाम बढ़ने से आम परिवारों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। सूखे और बाजार में कम आवक के बीच दिवाली से पहले खाद्यान्न की बढ़ती कीमतों ने चिंता बढ़ा दी है।
गेहूं और ज्वार की कीमतों में तेजी
पिछले तीन महीनों में गेहूं की कीमत प्रति क्विंटल करीब 1,000 रुपये तक बढ़ गई है। वहीं, बार्शी ज्वार के दाम भी तेजी से बढ़े हैं। पहले 7,000 रुपये प्रति क्विंटल मिलने वाली बार्शी ज्वार अब 8,500 रुपये तक पहुंच गई है। हाइब्रिड ज्वार की कीमत भी 3,500 से 4,000 रुपये प्रति क्विंटल तक हो गई है। अनाज की कीमतों में इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम परिवारों के मासिक खर्च पर पड़ रहा है। रोजाना की जरूरतों के लिए बाजार जाने वाले लोगों को अब पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
एक महीने में दालों के दाम 30 प्रतिशत तक बढ़े
दालों की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है। पिछले एक महीने में दालों के दाम 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। तूर दाल 138 से 141 रुपये प्रति किलो और उड़द दाल 130 से 135 रुपये प्रति किलो बिक रही है। दालें आम आदमी के रोजमर्रा के भोजन का अहम हिस्सा हैं। ऐसे में इनके दाम बढ़ने से परिवारों के लिए रसोई का खर्च संभालना मुश्किल होता जा रहा है।
चावल के दाम भी बढ़े, आगे और महंगाई की आशंका
गेहूं, ज्वार और दालों के साथ चावल की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। सूखे की स्थिति, बाजार में कम आवक और बढ़ती मांग के बीच आने वाले दिनों में खाद्यान्न की कीमतें और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। दिवाली से पहले खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से आम परिवारों की चिंता बढ़ गई है। त्योहार के खर्च के साथ रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी अब जेब पर भारी पड़ रहा है।


