राज माहोरे| प्रतिनिधि, अमरावती
गुरुकुंज मोजरी. संपूर्ण विश्व को मानवता, ग्राम विकास और सेवाभाव का संदेश देने वाले क्रांतिकारी विचारक, स्वतंत्रता सेनानी राष्ट्रसंत श्री तुकडोजी महाराज के 58वें पुण्यतिथि महोत्सव का शनिवार, 24 अक्टूबर से श्रीक्षेत्र गुरुकुंज आश्रम में शुभारंभ हो रहा है। 24 से 31 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस सात दिवसीय महोत्सव के लिए गुरुकुंज आश्रम पूरी तरह तैयार हो चुका है। समाधि स्थल, प्रार्थना मंदिर, मुख्य प्रवेश द्वार और आश्रम परिसर आकर्षक रोशनी से जगमगा उठा है।
अखिल भारतीय श्रीगुरुदेव सेवामंडल की ओर से महोत्सव की व्यापक तैयारियां की गई हैं। राष्ट्रसंत के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के साथ ही अध्यात्म, सामाजिक जागरूकता, ग्राम विकास, साहित्य, संगीत, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा का अनूठा संगम इस महोत्सव में देखने को मिलेगा।
महोत्सव के सात दिनों के दौरान सामूहिक ध्यान, सामूहिक प्रार्थना एवं चिंतन, ग्राम स्वच्छता अभियान, ग्रामगीता प्रवचन, वारकरी कीर्तन सम्मेलन यानी ‘गुरुकुंज वारी’, अभंग गायन, खंजेरी भजन, योगासन शिविर, अंतरमहाविद्यालयीन वक्तृत्व प्रतियोगिता, गजल गायन, कवि सम्मेलन, ग्रामगीताचार्य उपाधि वितरण समारोह, कार्यकर्ता सम्मेलन, महिला सम्मेलन, स्वास्थ्य शिविर और रक्तदान शिविर सहित अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इस वर्ष महोत्सव में कुछ विशेष कार्यक्रम पहली बार शामिल किए गए हैं। इनमें इंद्रजीत भालेराव द्वारा प्रस्तुत ‘गांवाकडे चल माह्या दोस्ता’, गौरीताई सांगळे का ‘शिवचरित्राचे भारूड’ तथा ‘मानवता का ध्यास’ की संकल्पना के अंतर्गत गजलनवाज भीमराव पांचाळे का गजल गायन विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।
राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज की स्मृतियों को नमन करने के लिए शुक्रवार, 30 अक्टूबर को मौन श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम के माध्यम से उपस्थित श्रद्धालु राष्ट्रसंत के मानवतावादी विचारों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करेंगे।
पुण्यतिथि महोत्सव में विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के प्रमुखों, संत-महंतों, कीर्तनकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा राजनीतिक क्षेत्र के नेताओं, सांसदों और विधायकों को आमंत्रित किया गया है।
आमंत्रित प्रमुख हस्तियों में श्रद्धेय जितेंद्रनाथ महाराज, श्री सयाजी महाराज, ह.भ.प. संजय महाराज पाचपोर, श्रद्धेय सचिनदेव महाराज, नामदेव अंबाडकर, श्रीकृष्ण गिरीधर, अभिजीत बोके, नारायण अग्रवाल, शुक्ला महाराज, बालासाहेब पावडे, रामचंद्र कांडलकर, बेनोड़ेकर, डॉ. अनिलजी सावरकर, आबा भोगे, महंत स्वामी वासुदेवानंद गिरी महाराज, मुनि पराशर, नाना महाराज और डॉ. विजय पर्बत सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों का समावेश है।
शनिवार, 24 अक्टूबर को तड़के 4 बजे तीर्थ स्थापना और राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज की महासमाधि का पूजन संत शंकर महाराज (पिंपलखुटा) के हाथों संपन्न होगा। इसके बाद वे सामूहिक ध्यान पर अपना चिंतन प्रस्तुत करेंगे। सर्वाधिकारी प्रकाश वाघ के हाथों मुख्य प्रवेश द्वार पर ध्वजारोहण किया जाएगा।
इसके पश्चात गुरुकुंज आश्रम और गुरुदेवनगर परिसर से राष्ट्रसंत की प्रतिमा की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा का संचालन मानकर स्वामी (आलंदी) करेंगे, जबकि आयोजन की जिम्मेदारी अमोल बांबल संभालेंगे। संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय की ओर से इस वर्ष पहली बार महोत्सव में लोकधुनों पर आधारित ‘फोक दिंडी’ प्रस्तुत की जाएगी।
शाम को सामूहिक प्रार्थना पर अंकुश घोगरे चिंतन प्रस्तुत करेंगे। रात में पुरुषोत्तम दाते और श्रीगुरुदेव बाल भजन मंडल, पवनार द्वारा खंजेरी भजन प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ ही श्रीज्योती शेलोटकर के कीर्तन का भी आयोजन किया गया है।
राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज के विचारों और आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना, समाज में मानवता की भावना को मजबूत करना तथा ग्राम विकास के कार्यों को प्रोत्साहित करना इस महोत्सव का प्रमुख उद्देश्य है।
धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जागरूकता, जनसेवा और रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाला यह सात दिवसीय पुण्यतिथि महोत्सव श्रद्धालुओं और समाजसेवा से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है।


