सोलापुर/पंढरपुर : स्थानीय जलग्रहण क्षेत्र में लगातार हुई बारिश के कारण उजनी डैम में पानी की आवक तेज हो गई है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने डैम से पानी का डिस्चार्ज बढ़ा दिया है, जिससे भीमा नदी किनारे बसे पंढरपुर, मालशिरस, मंगळवेढ़ा और अक्कलकोट क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा फिर गहरा गया है।
सोमवार दोपहर 2:30 बजे से डैम के स्पिलवे से छोड़े जाने वाले पानी को बढ़ाकर 60 हजार क्यूसेक कर दिया गया। वहीं, बिजली उत्पादन केंद्र से 1,600 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद भीमा नदी में कुल प्रवाह करीब 70 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया। उजनी डैम अब अपनी क्षमता के 98.01 प्रतिशत तक भर चुका है। सोमवार शाम तक डैम का कुल जल भंडारण 116.17 टीएमसी दर्ज किया गया, जबकि उपयोगी जल भंडारण 52.51 टीएमसी रहा। लगातार बढ़ रहे जलस्तर के कारण प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है। रविवार को पानी का डिस्चार्ज कम होने से पंढरपुर की चंद्रभागा नदी का जलस्तर कुछ घटा था और लोगों को थोड़ी राहत मिली थी। लेकिन सोमवार शाम फिर से पानी छोड़े जाने के बाद नदी किनारे रहने वाले किसानों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।
अक्कलकोट तालुका के अळगी, खानापुर और हिळळी के कोल्हापुर पद्धति के बंधारे अब भी पानी में डूबे हुए हैं। प्रशासन ने लोगों से नदी में उतरने से बचने, पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखने और निचले इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। पंढरपुर में भीमा नदी का प्रवाह करीब 80,129 क्यूसेक दर्ज किया गया। एहतियात के तौर पर आठ घरों के 50 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। वहीं, बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए विठ्ठल मंदिर समिति की ओर से भोजन की व्यवस्था भी की गई है। प्रशासन का कहना है कि बारिश और डैम में पानी की आवक के अनुसार डिस्चार्ज में आगे भी बदलाव किया जा सकता है। ऐसे में नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।


