नांदेड़ : जिला नियोजन समिति की शुक्रवार को हुई बैठक में महावितरण के कामकाज पर जनप्रतिनिधियों का गुस्सा खुलकर सामने आया। लगातार बिजली कटौती, रात में भारनियमन, गलत बिजली बिल, शिकायतों की अनदेखी और अधिकारियों के रवैये को लेकर सभी दलों के प्रतिनिधियों ने महावितरण को घेर लिया। कई बार अधिकारियों के जवाब संतोषजनक नहीं रहे, जिससे बैठक का माहौल भी गरमा गया।
पालकमंत्री अतुल सावे ने अधिकारियों को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर परिणाम दिखाई देने चाहिए। उन्होंने कहा कि बार-बार निर्देश देने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं होना चिंता का विषय है और इससे सरकार की छवि भी प्रभावित हो रही है।
बैठक में जनप्रतिनिधियों ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में बिना पूर्व सूचना बिजली बंद कर दी जाती है। रात के समय होने वाले भारनियमन से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जबकि किसान सिंचाई के लिए बिजली पर निर्भर हैं। कई प्रतिनिधियों ने सवाल उठाया कि जब जनता उनसे जवाब मांगती है तो वे आखिर क्या कहें। लोकप्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि कई अधिकारी फोन तक नहीं उठाते और शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेते। गलत बिजली बिलों के कारण आम लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित होने से सिंचाई पंप बंद पड़ रहे हैं और फसलों को पानी नहीं मिल पा रहा है। इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ रहा है। वहीं छोटे व्यापारी, दुकानदार और लघु उद्योग भी अनियमित बिजली आपूर्ति से परेशान हैं।पालकमंत्री ने महावितरण को निर्देश दिया कि ग्राहकों की शिकायतों को प्राथमिकता दी जाए, जनप्रतिनिधियों से समन्वय रखा जाए और बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बैठक में दिए गए आश्वासनों का असर अब लोगों को दिखना चाहिए। बैठक में व्यक्त हुए सर्वदलीय आक्रोश के बाद अब पूरे जिले की नजर इस बात पर है कि महावितरण वास्तव में अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करता है या फिर यह मामला भी केवल आश्वासनों तक सीमित रह जाता है।


