मराठवाड़ा का नाम सामने आते ही सबसे पहले पानी की किल्लत और सूखे की तस्वीर सामने आती है। सालों से यहां के लोग पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। कभी खेती पर संकट आता है, तो कभी पीने के पानी के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ता है। लेकिन अब इस तस्वीर को बदलने की दिशा में महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मराठवाड़ा वॉटर ग्रिड प्रोजेक्ट को गति देने के निर्देश दिए हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पहले चरण के लिए जापान की संस्था JICA की ओर से करीब 20 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।
चार जिलों तक पहुंचेगा पानी
इस परियोजना के पहले चरण में छत्रपति संभाजीनगर, बीड, लातूर और धाराशिव जिलों को शामिल किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों तक पानी पहुंचाना है, जहां पानी की कमी अधिक है। इसके लिए अधिक जलसाठा वाले बांधों से सूखाग्रस्त क्षेत्रों के बांधों तक बंद पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाया जाएगा।
इस योजना के तहत जायकवाड़ी, माजलगांव, मांजरा, उजनी, निम्न तेरणा और निम्न मनार बांधों को आपस में जोड़ा जाएगा। करीब 3,095 किलोमीटर लंबी मुख्य और सहायक पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इसके अलावा 15 जलशुद्धिकरण केंद्र भी बनाए जाएंगे। सरकार के मुताबिक, इस परियोजना से लगभग एक करोड़ लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
20 हजार करोड़ की मदद, जापान की तकनीक का इस्तेमाल
पूरे आठ जिलों में वॉटर ग्रिड परियोजना की अनुमानित लागत करीब 25,056 करोड़ रुपये है। वहीं, पहले चरण के लिए लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का कर्ज देने के मामले में जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।खास बात यह है कि लातूर और धाराशिव भूकंप संभावित क्षेत्र हैं। ऐसे में परियोजना के निर्माण में जापान की आधुनिक भूकंपरोधी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें डक्टाइल आयरन पाइप, आधुनिक पंपिंग सिस्टम और SCADA तकनीक शामिल होगी।
उद्योगों को भी मिलेगा फायदा
इस परियोजना का फायदा सिर्फ आम नागरिकों और किसानों तक सीमित नहीं रहेगा। छत्रपति संभाजीनगर के ऑरिक सिटी, शेंद्रा-बिडकीन और वाळूज औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित उद्योगों को भी स्थायी जलापूर्ति उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इससे औद्योगिक विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।
2029 तक काम पूरा करने का लक्ष्य
मुंबई में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में JICA के वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में परियोजना की प्रगति पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने प्राथमिक परियोजना रिपोर्ट जल्द अपलोड कर केंद्र सरकार के आर्थिक मामलों के विभाग को भेजने के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही परियोजना प्रबंधन सलाहकार की नियुक्ति और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया भी तेजी से पूरी की जाएगी। सरकार ने 2029 तक परियोजना का काम पूरा करने की दिशा में योजना बनाई है।
अब उम्मीदों पर खरा उतरना जरूरी
मराठवाड़ा के लोगों के लिए पानी की समस्या केवल एक सरकारी मुद्दा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी चुनौती है। ऐसे में वॉटर ग्रिड परियोजना की घोषणा और इसे मिलने वाली आर्थिक सहायता की सकारात्मक प्रतिक्रिया निश्चित रूप से उम्मीद जगाती है। हालांकि, असली बदलाव तभी दिखाई देगा जब पाइपलाइन जमीन पर उतरेगी और लोगों के घरों, खेतों तथा उद्योगों तक नियमित रूप से पानी पहुंचेगा। अब मराठवाड़ा की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वर्षों से चली आ रही पानी की समस्या को यह मेगा प्रोजेक्ट कब तक खत्म कर पाता है।


