दिवाली का त्योहार हो और घर लौटने की तैयारी कर रहे लोगों के सामने बसों की चिंता खड़ी हो जाए, तो सफर का पूरा गणित बिगड़ सकता है। महाराष्ट्र में कुछ ऐसा ही संकट खड़ा होने की आशंका है। महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन महामंडल (एसटी) के कर्मचारियों ने अपनी लंबित आर्थिक मांगों को लेकर 3 नवंबर से राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। ऐसे में दिवाली पर अपने गांव जाने वाले यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है।
महाराष्ट्र एसटी कामगार संगठन ने कर्मचारियों की मांगों को लेकर आंदोलन का रास्ता अपनाया है। संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष संदीप शिंदे और महासचिव हनुमंत ताटे ने परिवहन मंत्री एवं एसटी महामंडल के अध्यक्ष प्रताप सरनाईक को ज्ञापन सौंपकर आंदोलन की चेतावनी दी है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी आर्थिक मांगें लंबित हैं, लेकिन अब तक उन पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
तीन चरणों में होगा आंदोलन
एसटी कर्मचारियों ने अपने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
– 3 नवंबर: राज्य के सभी एसटी डिपो में घंटानाद और तीव्र प्रदर्शन।
– 4 नवंबर: प्रदेशभर में द्वार सभाएं और विरोध प्रदर्शन।
– 5 नवंबर से: मांगें पूरी होने तक अनिश्चितकालीन धरना आंदोलन।
आखिर क्या चाहते हैं एसटी कर्मचारी?
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में दिवाली के मौके पर 25 हजार रुपये की दिवाली भेंट और 12,500 रुपये की सण अग्रिम राशि तुरंत देने की मांग शामिल है। इसके अलावा वेतनवृद्धि और लंबे समय से लंबित भत्तों का भुगतान भी कर्मचारी चाहते हैं।
उनकी अन्य प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
– वर्ष 2016 से वार्षिक वेतनवृद्धि और मकान किराया भत्ते का बकाया दिया जाए।
– वर्ष 2018 से महंगाई भत्ते की पूरी बकाया राशि का भुगतान किया जाए।
– जनवरी 2026 से महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया जाए।
– राज्य सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर वेतनमान लागू किया जाए।
– चयन श्रेणी और श्रेणीकरण से संबंधित परिपत्र रद्द किया जाए।
– सेवानिवृत्त कर्मचारियों की लंबित आर्थिक देनदारियों का भुगतान किया जाए।
– वर्दी भत्ता, धुलाई भत्ता और स्थानीय पूरक भत्ते का बकाया दिया जाए।
यात्रियों की बढ़ सकती है परेशानी
दिवाली के दौरान बड़ी संख्या में लोग एसटी बसों से अपने गांव और परिवार के पास पहुंचते हैं। खासकर नौकरी और काम के सिलसिले में शहरों में रहने वाले लोग त्योहार पर एसटी बसों को सफर का भरोसेमंद साधन मानते हैं। ऐसे में कर्मचारियों का आंदोलन लंबा खिंचने पर बस सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
फिलहाल कर्मचारियों की मांगों पर क्या फैसला होता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। एक तरफ कर्मचारी अपने आर्थिक अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ त्योहार पर घर पहुंचने की तैयारी कर रहे यात्रियों के मन में बस सेवा को लेकर चिंता बढ़ रही है। अब देखना होगा कि दिवाली के इस माहौल में सरकार और एसटी प्रशासन कर्मचारियों की मांगों पर कोई समाधान निकाल पाते हैं या नहीं।


