नागपुर : कॉलेज में नया एडमिशन सिर्फ एक नई कक्षा में कदम रखना नहीं होता, बल्कि यह जीवन के एक नए सफर की शुरुआत होती है। इसी भावना के साथ राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय ने अपने नए विद्यार्थियों का पहली बार दो दिवसीय ‘दीक्षारंभ’ कार्यक्रम के जरिए स्वागत किया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ आत्मविश्वास, व्यक्तित्व विकास, करियर और जीवन कौशल से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें बताई गईं।
गुरुनानक भवन में 7 और 8 सितंबर को आयोजित कार्यक्रम में प्रसिद्ध शिक्षाविद् एवं लाइफ स्किल ट्रेनर डॉ. संजय रघाटाटे ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए सबसे पहले खुद से प्यार करना और खुद पर विश्वास करना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे दूसरों से अपनी तुलना करने के बजाय अपनी क्षमताओं को पहचानें और उन्हें निखारने पर ध्यान दें। डॉ. रघाटाटे ने विद्यार्थियों से कहा कि नागपुर विश्वविद्यालय जैसे ऐतिहासिक संस्थान में प्रवेश मिलना अपने आप में गर्व की बात है। विद्यार्थियों को अपने भीतर यह आत्मविश्वास पैदा करना चाहिए कि वे दूसरों से अलग हैं और कुछ बेहतर करने की क्षमता रखते हैं।
उन्होंने कहा कि हर विद्यार्थी के अपने सपने होते हैं—अच्छी नौकरी, बेहतर घर और सुखी परिवार। इन सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत के साथ सही दिशा और कौशल जरूरी है। शिक्षकों द्वारा दिए गए कार्य को रुचि से पूरा करने, कक्षा में सवालों के जवाब आत्मविश्वास से देने और अच्छे लोगों की संगति में रहने की सलाह भी उन्होंने दी।
स्टार्टअप के लिए भी मिलेगा मंच
डॉ. रघाटाटे ने विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ उद्यमिता की ओर बढ़ने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों को उद्यमी बनाने के उद्देश्य से इन्क्यूबीन फाउंडेशन की स्थापना की है। इसके माध्यम से विद्यार्थी अपने नए आइडिया पर काम करते हुए स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से तनाव से दूर रहकर खुशी के साथ पढ़ाई करने और जीवन में आने वाली चुनौतियों का आत्मविश्वास से सामना करने का आह्वान किया।
‘खुद को कमजोर न समझें’
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के प्र-कुलगुरू डॉ. अखिलेश पेशवे ने नए विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी खुद को कभी कमजोर न समझें और अपने साथ-साथ अपने शिक्षकों पर भी भरोसा रखें। उन्होंने विद्यार्थियों को लक्ष्य से भटकने से बचने, नियमित योजना बनाकर मेहनत करने और समय-समय पर आत्मपरीक्षण करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए भाग्य को दोष देने के बजाय मेहनत और सही नियोजन पर भरोसा करना चाहिए। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों से नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रहने की अपील की।
दो दिनों में विश्वविद्यालय से कराई गई पहचान
आयक्यूएसी के निदेशक डॉ. नंदकिशोर करडे ने बताया कि पहले नए विद्यार्थियों का स्वागत अलग-अलग विभागों में किया जाता था। इस बार सभी नए विद्यार्थियों को एक साथ जोड़ने और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, सुविधाओं, तकनीक और शिक्षकों से परिचित कराने के उद्देश्य से ‘दीक्षारंभ’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। दो दिवसीय कार्यक्रम में विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के इतिहास, NEP 2020, विद्यार्थी विकास योजनाओं, रिसर्च, इनोवेशन, स्टार्टअप, संविधानिक मूल्यों, मानसिक स्वास्थ्य, जीवन कौशल, महिला सशक्तिकरण और वित्तीय जागरूकता जैसे विभिन्न विषयों की जानकारी दी गई।
विद्यार्थियों को ‘देख ले इंडिया’ डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई। इसके अलावा राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज के विचारों, विश्वविद्यालय में उपलब्ध शोध सुविधाओं और ज्ञानस्त्रोत केंद्र की जानकारी भी दी गई। कार्यक्रम में विभिन्न शैक्षणिक विभागों के प्रमुख, शिक्षक और बड़ी संख्या में नए विद्यार्थी मौजूद रहे। पहली बार आयोजित इस ‘दीक्षारंभ’ ने नए विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय की दुनिया से परिचय के साथ-साथ आत्मविश्वास और नए सपनों के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी दिया।


