नागपुर : अनुदानित जूनियर कॉलेजों में पढ़ाने वाले हजारों शिक्षकों के लिए नई संचमान्यता चिंता का कारण बन गई है। 2025-26 के लिए पहले जहां कक्षा और तुकड़ी के आधार पर शिक्षक पद तय किए जाते थे, वहीं अब विषयवार छात्रसंख्या के आधार पर संचमान्यता निर्धारित की जा रही है। शिक्षक संगठनों का दावा है कि नए नियम लागू होने पर राज्य में करीब 9 से 10 हजार शिक्षक अतिरिक्त हो सकते हैं।
इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर पदवी महाविद्यालयों से जुड़े जूनियर कॉलेजों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। वर्ष 2009 के नियमों के अनुसार तुकड़ियों की संख्या के आधार पर शिक्षक पदों को मंजूरी दी जाती थी। विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से एक या दो तुकड़ियां मंजूर होती थीं और उसी के अनुसार शिक्षकों की संख्या तय की जाती थी।
अब 2025-26 की संचमान्यता में विषय को आधार बनाया गया है। भाषाविषयों के लिए 120 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक का नियम रखा गया है। इसमें मराठी, हिंदी, अंग्रेजी और अर्थशास्त्र जैसे विषय शामिल हैं। पहले इन विषयों के लिए अलग-अलग शिक्षक पद उपलब्ध होते थे, लेकिन अब चार विषयों को एक साथ जोड़कर एक शिक्षक पद देने की व्यवस्था से पदों की संख्या कम होने की चिंता बढ़ गई है।
44 हजार पद मंजूर, करीब 38 हजार शिक्षक कार्यरत
राज्य के अनुदानित जूनियर कॉलेजों में करीब 44 हजार शिक्षक पद मंजूर हैं, जबकि लगभग 38 हजार शिक्षक कार्यरत हैं। नई संचमान्यता की अंतिम अंमलबजावणी अभी नहीं हुई है। हालांकि, 30 सितंबर को 2026-27 की संचमान्यता होने वाली है। ऐसे में शिक्षकों के बीच भविष्य को लेकर असमंजस और चिंता बढ़ती जा रही है। शिक्षक संगठनों ने इस फैसले का विरोध भी शुरू कर दिया है। आयुक्त कार्यालयों पर मोर्चा निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन इसकी अनुमति नहीं मिली। शिक्षकों का कहना है कि यदि पदों की संख्या कम हुई तो इसका सीधा असर उनकी नौकरी और भविष्य पर पड़ेगा।
कला और वाणिज्य शाखा में पहले पहली तुकड़ी के लिए तीन और दूसरी तुकड़ी के लिए छह शिक्षकों की व्यवस्था थी। वहीं विज्ञान शाखा में पहली तुकड़ी के लिए चार और दूसरी तुकड़ी के लिए छह शिक्षक पद मंजूर किए जाते थे। शिक्षक संगठनों का आरोप है कि अनुदानित जूनियर कॉलेजों में शिक्षकों की संख्या कम करने और नई भर्ती पर रोक लगाने के उद्देश्य से यह बदलाव किया गया है। दूसरी ओर, स्वयंअर्थसहायित जूनियर कॉलेजों पर ऐसी सीमा नहीं होने का मुद्दा भी शिक्षक उठा रहे हैं। अब सबकी नजर 30 सितंबर की संचमान्यता पर है कि नए नियमों का वास्तविक असर कितने शिक्षक पदों पर पड़ता है।


