पति को खोया, अब नई जिंदगी की ओर कदम; मुख्यमंत्री करेंगे एकल मां का कन्यादान

‘सोबत’ पालकत्व परियोजना के तहत पहला विवाह, दो बच्चों को मिलेगा पिता का स्नेह

नागपुर : कोरोना महामारी ने कई परिवारों से उनका सहारा छीन लिया। किसी ने पति खोया तो किसी के सिर से पिता का साया उठ गया। ऐसे ही कठिन दौर से गुजर रही नागपुर की एक मां अब जिंदगी का नया अध्याय शुरू करने जा रही है। कोरोना काल में पति को खोने के बाद अपने दो बच्चों की जिम्मेदारी अकेले संभाल रही इस महिला का विवाह 20 अगस्त को नागपुर में होने जा रहा है। इस विवाह में स्वयं संदीप जोशी कन्यादान करेंगे।

लक्ष्मीनगर स्थित रानी लक्ष्मी सभागृह में सुबह 9.51 बजे अभिजीत मुहूर्त पर विवाह समारोह आयोजित किया गया है। यह विवाह पूर्व विधायक संदीप जोशी की पहल से शुरू किए गए ‘सोबत पालकत्व प्रकल्प’ के तहत होने वाला पहला विवाह है।

एक मां को फिर मिला परिवार का सहारा

पति के निधन के बाद दो बच्चों की परवरिश, उनकी पढ़ाई और भविष्य की चिंता इस मां के सामने बड़ी चुनौती थी। अब एक पंजाबी युवक ने इस महिला और उसके दोनों बच्चों की जिम्मेदारी स्वीकार की है। इस नए रिश्ते के साथ बच्चों को भी पिता का स्नेह और परिवार का नया सहारा मिलने की उम्मीद है। इस विवाह की सबसे खास बात संदीप जोशी  कन्यादान करना है। पिता की तरह इस महिला के साथ खड़े होकर मुख्यमंत्री इस नए रिश्ते को आशीर्वाद देंगे। यही वजह है कि यह विवाह सिर्फ एक पारिवारिक समारोह न रहकर संवेदनशीलता और मानवीय रिश्तों का उदाहरण बन गया है।

दर्द से निकली ‘सोबत’ की पहल

कोरोना के दौरान कई परिवारों ने अपने कमाने वाले सदस्य को खो दिया था। खासकर उन माताओं के सामने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई थीं। उस समय नागपुर के तत्कालीन महापौर संदीप जोशी ने इन परिवारों की मदद के लिए सिर्फ आर्थिक सहायता तक सीमित न रहने का फैसला किया। इसी सोच से श्री सिद्धिविनायक सेवा ट्रस्ट के माध्यम से ‘सोबत पालकत्व प्रकल्प’ की शुरुआत हुई। वर्तमान में इस परियोजना से 289 एकल माताएं जुड़ी हैं। इनमें से 100 माताओं की पालकत्व की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वीकार की है। माताओं और उनके बच्चों की शिक्षा व स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके जीवन में फिर से खुशियां लौटाने के उद्देश्य से 350 माताओं और बेटियों के विवाह कराने का संकल्प लिया गया है। 20 अगस्त को होने वाला विवाह इसी संकल्प की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है।

‘मैं तुम्हारे साथ हूं’ का भरोसा

किसी मुश्किल दौर से गुजर रहे व्यक्ति के लिए हर बार बड़ी आर्थिक मदद की जरूरत नहीं होती। कई बार सिर्फ यह भरोसा कि ‘आप अकेले नहीं हैं, हम आपके साथ हैं’ जिंदगी को फिर से संभालने की ताकत देता है। ‘सोबत’ परियोजना की मूल भावना भी यही है। एक महिला, जिसने पति को खोने के बाद अकेले अपने बच्चों को संभाला, अब नए परिवार की ओर बढ़ रही है। उसके बच्चों को पिता का स्नेह मिलेगा और उसे जीवन का नया साथी। इस लिहाज से यह विवाह दो लोगों के रिश्ते से कहीं बढ़कर एक परिवार के दोबारा बसने की कहानी है। संदीप जोशी ने नागरिकों से इस विवाह समारोह में उपस्थित होकर नवविवाहित दंपती को आशीर्वाद देने की अपील की है।

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