पुणे : महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई महाराष्ट्र सरकार की ‘पिंक ई-ऑटो’ योजना पुणे में उम्मीद के मुताबिक रफ्तार नहीं पकड़ पाई है। हालात ऐसे हैं कि करीब 4 हजार ई-ऑटो के लक्ष्य के मुकाबले अब तक सिर्फ 17 महिलाओं ने सभी औपचारिकताएं पूरी कर अपना व्यवसाय शुरू किया है।
योजना की धीमी प्रगति को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए महिलाओं को मिलने वाली सब्सिडी 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी है। साथ ही, राज्य के आठ जिलों में लाभार्थियों की संख्या 10 हजार से घटाकर 5 हजार कर दी गई है। नए सरकारी आदेश के अनुसार, जिन महिलाओं को पहले ही ‘पिंक ई-ऑटो’ मिल चुका है, उन्हें भी कर्ज चुकाने के लिए अतिरिक्त 20 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ मिलेगा। योजना के तहत लाभार्थी महिला को वाहन की कुल कीमत का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा स्वयं देना होगा, जबकि शेष राशि बैंक ऋण या ब्याज मुक्त स्थगित भुगतान सुविधा के जरिए जुटाई जा सकेगी। हालांकि, ‘परिसर’ और ‘असर सोशल इम्पैक्ट एडवाइजर्स’ द्वारा किए गए सर्वे में कई ऐसी समस्याएं सामने आई हैं, जिनकी वजह से महिलाएं इस योजना से जुड़ने में हिचक रही हैं। पात्रता की जानकारी का अभाव, जटिल दस्तावेजी प्रक्रिया, आवेदन में देरी, बैंक ऋण स्वीकृति की मुश्किलें, स्वयं का आर्थिक योगदान जुटाने की परेशानी और नियमित आय को लेकर अनिश्चितता प्रमुख कारण बताए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ सब्सिडी बढ़ाने से योजना सफल नहीं होगी। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाना, जिला स्तर पर शिकायत निवारण व्यवस्था तैयार करना, परमिट और रूट आवंटन में तेजी लाना, तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना और मेट्रो स्टेशन व भीड़भाड़ वाले इलाकों में ‘पिंक ई-ऑटो’ के लिए अलग पार्किंग की व्यवस्था करना बेहद जरूरी है। योजना से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि अपनी ई-ऑटो चलाने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और वे आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं। छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों से भी उन्हें अच्छा सहयोग मिल रहा है। लेकिन यदि सरकार और संबंधित विभाग समय पर सहयोग करें तो कहीं अधिक महिलाएं इस रोजगार से जुड़ सकती हैं।


