नागपुर : मेडिकल, इंजीनियरिंग समेत विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। शैक्षणिक वर्ष 2026-27 में प्रवेश निश्चित हो चुके विद्यार्थियों को जात वैधता प्रमाणपत्र जमा करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने तीन महीने की अतिरिक्त मोहलत दी है। जात वैधता प्रमाणपत्र की प्रक्रिया में देरी के कारण जिन विद्यार्थियों के सामने प्रवेश रद्द होने का डर था, उन्हें इस फैसले से राहत मिली है।
राज्य में इस समय इंजीनियरिंग, मेडिकल और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो रही है। कई विद्यार्थियों का प्रवेश निश्चित हो चुका है. लेकिन जात वैधता प्रमाणपत्र तैयार होने में लगने वाले समय के कारण विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंता बढ़ गई थी। इसी को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने 4 सितंबर को परिपत्रक जारी कर संबंधित विद्यार्थियों को जात वैधता प्रमाणपत्र जमा करने के लिए अगले तीन महीने की समय सीमा दी है। हालांकि, इस अवधि में प्रमाणपत्र जमा करना विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य रहेगा।
इन विद्यार्थियों को मिलेगा फायदा
सरकार के इस निर्णय का लाभ अनुसूचित जाति (SC), विमुक्त जाति (VJ), भटक्या जमाती (NT), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और विशेष पिछड़ा वर्ग (SBC) के विद्यार्थियों को मिलेगा। जात वैधता की प्रक्रिया में देरी के कारण शिक्षा प्रभावित होने की चिंता कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह फैसला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रवेश रद्द होने की चिंता हुई कम
जात वैधता प्रमाणपत्र समय पर जमा नहीं होने की वजह से कहीं प्रवेश पर असर न पड़े, इस बात को लेकर विद्यार्थी और उनके परिवार चिंतित थे। सरकार की तीन महीने की मोहलत से फिलहाल यह चिंता दूर हुई है। अब विद्यार्थियों को अपनी जात वैधता प्रक्रिया पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है।
SEBC और OBC विद्यार्थियों के लिए पहले से 6 महीने की समय सीमा
इस बीच, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग (SEBC) और OBC प्रवर्ग के प्रवेश निश्चित हो चुके उम्मीदवारों को पहले ही जात वैधता प्रमाणपत्र जमा करने के लिए आवेदन की तारीख से छह महीने की अवधि दी गई है। इसलिए इन विद्यार्थियों पर पहले से लागू छह महीने की समय सीमा ही लागू रहेगी।
तीन महीने की मोहलत अंतिम
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 4 सितंबर के परिपत्रक के तहत दी गई तीन महीने की अवधि अंतिम अवसर है। इस अवधि के बाद किसी भी परिस्थिति में आगे समय नहीं दिया जाएगा। इसलिए संबंधित विद्यार्थियों के लिए अब राहत के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। उन्हें बिना देरी किए जात वैधता प्रमाणपत्र की प्रक्रिया पूरी करनी होगी और निर्धारित समय के भीतर प्रमाणपत्र जमा करना होगा।


