महाराष्ट्र में कम बारिश और सूखे की मार झेल रहे किसान परिवारों के लिए राज्य सरकार ने राहत भरा फैसला लिया है। अब सूखाग्रस्त क्षेत्रों के पात्र विद्यार्थियों को शैक्षणिक वर्ष 2026-27 में परीक्षा शुल्क नहीं भरना होगा। सरकार के इस निर्णय से उन परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके लिए खेती में हुए नुकसान के बीच बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना भी चुनौती बन गया है।
दरअसल, इस साल राज्य के कई हिस्सों में बारिश कम होने के कारण फसलों को नुकसान पहुंचा है। इसका सीधा असर किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ा है। ऐसे में बच्चों की शिक्षा और परीक्षा से जुड़ा खर्च भी परिवारों पर अतिरिक्त बोझ बन रहा है। इसी परेशानी को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने पात्र विद्यार्थियों के परीक्षा शुल्क माफ करने का निर्णय लिया है।
सभी विद्यार्थियों को नहीं मिलेगा लाभ
इस शुल्कमाफी का लाभ लेने के लिए सरकार ने कुछ नियम और शर्तें तय की हैं। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, सूखाग्रस्त क्षेत्रों के नियमित विद्यार्थियों को ही इस सुविधा का लाभ मिलेगा। बाहरी यानी प्राइवेट रूप से परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को इस योजना में शामिल नहीं किया गया है। इसके अलावा, किसी विषय या उसी परीक्षा में दोबारा शामिल होने वाले विद्यार्थियों को भी इस शुल्कमाफी का लाभ नहीं मिलेगा। यानी यह राहत मुख्य रूप से नियमित रूप से पढ़ाई कर रहे पात्र विद्यार्थियों के लिए लागू होगी।
सिर्फ गांव में खेती होने से नहीं मिलेगी छूट
सरकार ने पात्रता को लेकर एक और महत्वपूर्ण शर्त स्पष्ट की है। शहर में नौकरी या व्यवसाय करने वाले व्यक्तियों के बच्चों को केवल इस आधार पर शुल्कमाफी नहीं मिलेगी कि उनके परिवार के पास गांव में खेती की जमीन है। योजना का लाभ देते समय परिवार की वास्तविक परिस्थितियों और निर्धारित सरकारी मानदंडों को ध्यान में रखा जाएगा।
50 प्रतिशत फीस माफ होने वालों को भी राहत
इस फैसले में उन विद्यार्थियों को भी राहत दी गई है, जिन्हें महाडीबीटी योजना के तहत पहले से 50 प्रतिशत परीक्षा शुल्क में छूट मिल रही थी। ऐसे पात्र विद्यार्थियों का बाकी 50 प्रतिशत शुल्क भी माफ किया जाएगा। यानी उन्हें परीक्षा शुल्क से पूरी तरह छूट मिल सकेगी।
सरकार के इस फैसले पर करीब 20 लाख 38 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान है। सूखे और फसल नुकसान के कारण आर्थिक संकट से गुजर रहे किसान परिवारों के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आखिरकार, परीक्षा शुल्क भले ही किसी के लिए छोटी रकम हो, लेकिन आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवारों के लिए यही खर्च बच्चों की पढ़ाई में बाधा बन सकता है। ऐसे में सरकार की यह पहल विद्यार्थियों को बिना अतिरिक्त आर्थिक दबाव के अपनी शिक्षा जारी रखने में मददगार साबित हो सकती है।


