नागपुर शहर की बढ़ती आबादी के साथ पानी की मांग भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में आने वाले वर्षों में शहर को पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है। इसी जरूरत को देखते हुए कामठी तहसील में प्रस्तावित कोलार-कन्हान बैराज परियोजना को प्रशासनिक मंजूरी दिलाने की दिशा में सरकारी स्तर पर प्रयास तेज हो गए हैं।
इस परियोजना को लेकर मुंबई स्थित मंत्रालय में राजस्व मंत्री एवं नागपुर के पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में परियोजना की प्रशासनिक मंजूरी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर चर्चा की गई। नागपुर के भविष्य की जलापूर्ति को देखते हुए इस परियोजना को काफी अहम माना जा रहा है।
952 करोड़ से अधिक का अनुमानित खर्च
जलसंपदा विभाग ने कोलार-कन्हान बैराज परियोजना की अनुमानित लागत 952.32 करोड़ रुपये तय की है। परियोजना का विस्तृत प्रारूप और तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं। फिलहाल प्रशासनिक मंजूरी के लिए प्रस्ताव शासन स्तर पर विचाराधीन है। प्रस्तावित बैराज की जल संग्रहण क्षमता 67.88 दशलक्ष घनमीटर बताई गई है। इसके तैयार होने से नागपुर शहर को अगले तीन दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त जलसाठा उपलब्ध होने की उम्मीद है।
31 अक्टूबर की बैठक के बाद तेज हुई प्रक्रिया
इस परियोजना को लेकर 31 अक्टूबर को नागपुर में आयोजित जलापूर्ति समीक्षा बैठक में भी चर्चा हुई थी। उस दौरान बावनकुले ने संबंधित अधिकारियों को करीब 900 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद परियोजना की विस्तृत अनुमानित लागत 952.32 करोड़ रुपये निर्धारित की गई। अब मंत्रालय में हुई बैठक के बाद परियोजना की प्रशासनिक मंजूरी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। बैठक में नागपुर महानगरपालिका आयुक्त डॉ. विपीन ईटनकर और वीआईडीसी के अधिकारी ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए।
फंडिंग का सवाल भी अहम
परियोजना को मंजूरी दिलाने के साथ ही इसके लिए धनराशि की व्यवस्था भी एक बड़ा मुद्दा है। परियोजना का क्रियान्वयन जलसंपदा विभाग के माध्यम से प्रस्तावित है, लेकिन इसका आर्थिक भार किस विभाग या एजेंसी को उठाना है, इस पर अंतिम निर्णय होना बाकी है। नागपुर महानगरपालिका ने अपनी आर्थिक सीमाओं और पहले से मौजूद कर्ज की जिम्मेदारियों को देखते हुए राज्य सरकार से परियोजना के लिए सीधे निधि उपलब्ध कराने की मांग की है।
फिलहाल नागपुर के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि भविष्य की पानी की जरूरतों को पूरा करने वाली इस परियोजना को कब तक मंजूरी और आवश्यक निधि मिलती है। क्योंकि आज लिया गया फैसला आने वाले वर्षों में शहर की जलापूर्ति व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।


