नागपुर : मौसम में होने वाले बदलाव और आने वाले महीनों में संभावित चारा व पेयजल संकट को देखते हुए नागपुर प्रशासन अभी से सतर्क हो गया है। मवेशियों को चारे की कमी न हो और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या खड़ी न हो, इसके लिए जिलाधिकारी कुमार आशीर्वाद ने अधिकारियों को समय रहते ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का जोर अब केवल मौजूदा स्थिति पर नहीं, बल्कि फरवरी तक की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयारी करने पर है।
जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में बताया गया कि फिलहाल नागपुर जिले में मवेशियों के लिए लगभग 260 से 270 दिनों का चारा उपलब्ध है। इसके बावजूद भविष्य में किसी तरह की परेशानी न हो, इसलिए अभी से चारा बुआई और उसके भंडारण की योजना तैयार करने को कहा गया है। बैठक में निवासी उपजिलाधिकारी अनूप खांडे, जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी डॉ. अर्चना कड़ और पशुपालन विभाग के जिला उपायुक्त नितिन फुके उपस्थित थे।
सरकारी जमीन पर उगाया जाएगा चारा
चारा उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रशासन सरकारी बंजर भूमि और तालाबों के डूब क्षेत्र का उपयोग करने की संभावनाएं तलाश रहा है। जल संसाधन और सिंचाई विभाग को दिसंबर के अंत तक उपलब्ध होने वाली गाद-बुआई भूमि और तालाबों के डूब क्षेत्र की गांववार जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, तहसीलदारों को चारा बुआई के लिए उपयुक्त सरकारी जमीन और अन्य उपलब्ध क्षेत्रों की सूची तैयार करनी होगी। इसके साथ ही तालुका कृषि अधिकारी और पशुपालन अधिकारियों को ऐसे किसानों तथा पशुपालकों की जानकारी जुटाने को कहा गया है, जो इन जमीनों पर चारा उगाने के इच्छुक हैं। जिन गांवों में भविष्य में चारे की कमी होने की आशंका है, उनकी अलग सूची भी तैयार की जाएगी।
बीजों के लिए अतिरिक्त बजट की तैयारी
चारा उत्पादन में किसानों और महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाने पर भी प्रशासन का ध्यान है। व्यक्तिगत लाभ की चारा बीज योजना के अलावा किसान समूहों या महिला स्वयं सहायता समूहों की ओर से अतिरिक्त बीजों की मांग आती है, तो जिला योजना समिति (डीपीसी) के माध्यम से बजट उपलब्ध कराया जाएगा। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बीज समय पर किसानों तक पहुंचें। भविष्य में सूखे और हरे चारे की उपलब्धता बनाए रखने के लिए गोदामों और भंडारण योग्य स्थानों की जानकारी भी जुटाई जाएगी।
173 संस्थाओं के साथ बनेगी रणनीति
चारा संकट से निपटने के लिए प्रशासन जनभागीदारी को भी महत्वपूर्ण मान रहा है। कृषि और पशुपालन विभाग को सरकारी योजनाओं तथा चारा बुआई के संबंध में व्यापक जनजागरूकता फैलाने के निर्देश दिए गए हैं। जिले की 173 संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर चारे की उपलब्धता और उसके नियोजन पर चर्चा की जाएगी। सभी तालुका स्तरीय अधिकारियों को शुक्रवार शाम तक संयुक्त बैठक कर जरूरी आंकड़े और कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है।
चारे के साथ पानी की चिंता, हर गांव का बनेगा प्लान
प्रशासन की तैयारी सिर्फ मवेशियों के चारे तक सीमित नहीं है। संभावित पेयजल संकट को देखते हुए जिलाधिकारी ने प्रत्येक गांव के लिए अलग पेयजल संकट निवारण योजना तैयार करने पर जोर दिया है। बैंक डैम और बोरवेल की मरम्मत को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए हैं।अधिकारियों को स्वयं ग्राम पंचायतों का दौरा कर सरपंच, उपसरपंच और ग्रामीणों से बातचीत करने को कहा गया है, ताकि गांव की वास्तविक जरूरतों को समझकर समय रहते समाधान किया जा सके।कुल मिलाकर, नागपुर प्रशासन ने चारा और पानी की संभावित किल्लत को लेकर पहले से तैयारी शुरू कर दी है। अब इन निर्देशों का जमीन पर कितना असर दिखाई देता है, यह आने वाले महीनों में तय होगा।


