महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की पेपरफुटी मामले की जांच को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। सरकार ने जांच समिति के सचिव पद पर वरिष्ठ अधिकारी तुकाराम मुंढे की नियुक्ति की घोषणा की थी। हालांकि, मुंढे ने स्पष्ट किया है कि उन्हें इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक पत्र या आदेश नहीं मिला है। उनके इस बयान के बाद जांच समिति की नियुक्ति और कामकाज को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
12 दिन के आंदोलन के बाद बनी थी जांच समिति
पुणे में MPSC के विद्यार्थियों ने पेपरफुटी मामले की निष्पक्ष जांच और अन्य मांगों को लेकर लगातार 12 दिनों तक आंदोलन किया था। विद्यार्थियों की मांग थी कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उचित कार्रवाई की जाए और सच्चाई सामने लाई जाए। इसके बाद सरकार ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित करने सहित विद्यार्थियों की अन्य मांगों को स्वीकार किया। सरकार के आश्वासन के बाद विद्यार्थियों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया था।
इसी दौरान जांच समिति के सचिव पद पर अन्न एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त तुकाराम मुंढे की नियुक्ति की घोषणा की गई थी। मुंढे जैसे वरिष्ठ और सख्त प्रशासनिक अधिकारी के नाम से विद्यार्थियों को जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ने की उम्मीद थी।
तुकाराम मुंढे ने क्या कहा?
MPSC से जुड़े सवाल पर तुकाराम मुंढे ने बताया कि उन्हें नियुक्ति के संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पत्र या आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। इस विषय पर शुरुआती स्तर पर चर्चा जरूर हुई है, लेकिन आधिकारिक पत्राचार या अधिसूचना नहीं मिली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक आधिकारिक आदेश प्राप्त नहीं होता, तब तक इस मामले पर अधिक टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। मुंढे ने यह भी बताया कि उन्हें इस नियुक्ति से संबंधित जानकारी मीडिया के माध्यम से ही मिली थी। शुरुआती चर्चा किसके साथ हुई, इस बारे में जानकारी देना भी उन्होंने उचित नहीं समझा।
विद्यार्थियों की उम्मीदों के बीच अब आगे क्या?
MPSC पेपरफुटी मामले ने पहले ही विद्यार्थियों की चिंता बढ़ा रखी है। ऐसे में 12 दिनों के आंदोलन के बाद जांच समिति की घोषणा होने से उन्हें मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की उम्मीद जगी थी। लेकिन सचिव पद पर नियुक्ति की घोषणा के बावजूद संबंधित अधिकारी को आधिकारिक आदेश नहीं मिलने की बात सामने आने से स्थिति पर असमंजस बना हुआ है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जांच समिति को औपचारिक रूप से कब जिम्मेदारी सौंपी जाएगी और जांच का काम कब शुरू होगा। फिलहाल, आधिकारिक आदेश मिलने के बाद ही इस मामले की अगली प्रक्रिया स्पष्ट हो सकेगी। विद्यार्थियों की नजरें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।


