महाराष्ट्र में पानी को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। 16 अक्टूबर से राज्य की सभी शहरी स्थानीय स्वशासी संस्थाओं के क्षेत्रों में कम से कम 10 प्रतिशत पानी कटौती लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का उद्देश्य उपलब्ध जल भंडार का सोच-समझकर इस्तेमाल करना और अगस्त 2027 तक नागरिकों के लिए पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
कम जल भंडार को देखते हुए फैसला
इस साल राज्य में बारिश अपेक्षा से कम होने के कारण जल भंडार पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे में आने वाले महीनों में पानी की कमी गंभीर रूप न ले, इसके लिए सरकार ने अभी से पानी के इस्तेमाल पर नियंत्रण रखने का फैसला किया है। जल संसाधन विभाग ने सभी शहरी स्थानीय निकायों को कम से कम 10 प्रतिशत पानी कटौती करने के निर्देश दिए हैं। यदि पानी की कमी और बढ़ती है, तो कटौती का प्रतिशत भी बढ़ाया जा सकता है। जनवरी-फरवरी में जल भंडार की स्थिति की समीक्षा के बाद आगे का निर्णय लिए जाने की संभावना है।
पिछले साल के मुकाबले कम हुआ जल भंडार
राज्य के बांधों में फिलहाल लगभग 72 प्रतिशत जल भंडार उपलब्ध है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 90 प्रतिशत था। जल भंडार में आई इस कमी को देखते हुए सरकार ने 31 अगस्त 2027 तक पीने के पानी की जरूरतों को ध्यान में रखकर नियोजन करने का निर्णय लिया है। सरकार की प्राथमिकता सबसे पहले नागरिकों को पीने का पानी उपलब्ध कराना है। इसके बाद पशुओं, घरेलू जरूरतों और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए पानी का नियोजन किया जाएगा। खेती के लिए पानी देने का फैसला भी उपलब्ध जल भंडार की समीक्षा के बाद लिया जाएगा।
उद्योगों के लिए 30 प्रतिशत पानी का पुनः उपयोग अनिवार्य
पानी की बचत के लिए सरकार ने औद्योगिक क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। उद्योगों को अपने कुल पानी के इस्तेमाल में से कम से कम 30 प्रतिशत पानी का पुनः उपयोग करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, सांडपानी यानी इस्तेमाल किए गए पानी को साफ करने वाले संयंत्रों को पूरी क्षमता से चलाने और प्रक्रिया के बाद प्राप्त पानी का इस्तेमाल उद्यानों, निर्माण कार्यों तथा धुलाई जैसे कामों में करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे पीने योग्य पानी की अनावश्यक खपत कम करने में मदद मिल सकती है।
पानी की बर्बादी रोकने के लिए भी कदम
राज्य में उपलब्ध पानी का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कई उपाय तय किए हैं।
पीने के पानी का आरक्षण: अगस्त 2027 तक पीने के पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए नियोजन किया जाएगा।
अवैध जल निकासी पर रोक: राजस्व, पुलिस और जल संसाधन विभाग की संयुक्त टीमें अनधिकृत रूप से पानी निकालने वालों पर नजर रखेंगी।
आपातकालीन जल भंडार: प्रत्येक बांध में 10 प्रतिशत अतिरिक्त आपातकालीन भंडार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
पानी की लीकेज रोकने पर जोर: स्थानीय निकायों को पानी की बर्बादी रोकने के लिए विशेष अभियान चलाने होंगे।
अतिरिक्त जल स्रोतों पर विचार: जरूरत पड़ने पर तकनीकी जांच के बाद बांधों के मृत जल भंडार के इस्तेमाल पर भी विचार किया जा सकता है।
रबी की खेती के लिए भी करना होगा नियोजन
पानी की उपलब्धता का असर खेती पर भी पड़ सकता है। सरकार की योजना के अनुसार, पीने के पानी, पशुओं और अन्य जरूरी जरूरतों के लिए पानी का प्रबंध करने के बाद उपलब्ध जल भंडार की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद ही खेती के लिए पानी देने का निर्णय होगा। कम पानी में तैयार होने वाली रबी की फसलों को प्राथमिकता देने के बाद अन्य रबी और बारहमासी फसलों के लिए पानी उपलब्ध कराने पर विचार किया जाएगा।
नागरिकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
पानी की कमी का असर केवल खेती या उद्योगों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा संबंध आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से भी है। घरों में पीने, खाना बनाने और अन्य जरूरतों के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध रहना जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने जल भंडार को लंबे समय तक बनाए रखने की योजना बनाई है। अब पानी की बचत और उपलब्ध संसाधनों का सही इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण होगा, ताकि आने वाले महीनों में नागरिकों को पानी की गंभीर समस्या का सामना न करना पड़े।


