नागपुर में लोकतंत्र और संविधान के मुद्दे पर राजनीतिक माहौल गरमाने लगा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के जरिए सड़क पर उतरने जा रही है। 5 नवंबर को नागपुर में होने वाली इस पदयात्रा का नेतृत्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी करेंगे। ऐसे में इस आयोजन को केवल एक पदयात्रा नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव के रूप में भी देखा जा रहा है।
यशवंत स्टेडियम से शुरू होगी पदयात्रा
BJP की ओर से यह पदयात्रा 5 नवंबर 2026 को शाम 4 बजे यशवंत स्टेडियम से शुरू होगी। महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री और BJP नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस पदयात्रा में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। हालांकि, अनुमानित संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं।
लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा बढ़ाने का BJP का दावा
BJP का कहना है कि विपक्षी दल लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया को लेकर लोगों के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। इसी के जवाब में पार्टी ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान चला रही है।पार्टी के मुताबिक, इस अभियान का उद्देश्य चुनावी निष्पक्षता, पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास मजबूत करने का संदेश देना है।
कांग्रेस ने पूछा- आखिर किसके लिए है यह अभियान?
दूसरी ओर, BJP के इस अभियान को लेकर कांग्रेस ने सवाल खड़े कर दिए हैं। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने BJP और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर ही लोकतंत्र और संविधान के विरोधी होने का आरोप लगाया है।
सपकाल का कहना है कि लोकतंत्र और संविधान बचाने की बात करने वाली BJP के दावे राजनीतिक विरोधाभास को दर्शाते हैं। कांग्रेस का आरोप है कि विपक्ष लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया को लेकर जो सवाल उठा रहा है, उनका जवाब देने के बजाय BJP राजनीतिक अभियान के जरिए अपनी बात रख रही है।
नागपुर में किसके पक्ष में बनेगा माहौल?
एक तरफ BJP लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति भरोसा मजबूत करने का संदेश लेकर जनता के बीच पहुंचने की तैयारी में है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस इस अभियान की मंशा पर सवाल उठा रही है। ऐसे में नागपुर की यह पदयात्रा राजनीतिक रूप से काफी अहम मानी जा रही है। अब सबकी नजर 5 नवंबर पर रहेगी। देखना दिलचस्प होगा कि इस पदयात्रा में कितनी भीड़ जुटती है और BJP के इस संदेश पर जनता की क्या प्रतिक्रिया रहती है।


