महाराष्ट्र में महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक सहारा देने के लिए राज्य सरकार एक नई योजना लाने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना के बाद अब सरकार का ध्यान उन महिलाओं पर है, जो अकेले अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। खासतौर पर एकल महिलाओं और उनके बच्चों को राहत देने के उद्देश्य से सरकार की ओर से पहल की जा रही है। मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने इस संबंध में अहम जानकारी दी है।
एकल महिलाओं के लिए सरकार की नई पहल
अखिल भारतीय पत्रकार संघ और महाराष्ट्र राज्य डिजिटल मीडिया, मुंबई की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में चंद्रकांत पाटिल ने बताया कि महाराष्ट्र में एकल महिलाओं की स्थिति को समझने और जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचाने के लिए जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य के स्कूलों और कॉलेजों में ऐसे विद्यार्थियों की जानकारी एकत्र की जा रही है, जिनके पिता नहीं हैं। इस सर्वेक्षण के जरिए उन परिवारों की स्थिति को समझने का प्रयास किया जा रहा है, जहां महिलाएं अकेले बच्चों की परवरिश और घर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
सर्वे में सामने आए 3 लाख एकल महिलाओं के मामले
चंद्रकांत पाटिल के मुताबिक, विद्यार्थियों के सर्वेक्षण के दौरान करीब 3 लाख एकल महिलाओं की जानकारी सामने आई है। अभी भी अधिक महिलाओं की जानकारी जुटाने का काम जारी है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में एकल महिलाओं की संख्या 12 लाख से अधिक है। सरकार का ध्यान उन बच्चों पर भी है, जिनके पिता नहीं हैं। ऐसे विद्यार्थियों और उनके परिवारों को प्रस्तावित योजना के माध्यम से किस तरह लाभ पहुंचाया जा सकता है, इस दिशा में काम किया जा रहा है।
अकेले परिवार संभालने वाली महिलाओं पर फोकस
परिवार में पति या पिता का साथ नहीं होने पर कई महिलाओं को बच्चों की परवरिश से लेकर घर के खर्च तक की जिम्मेदारी अकेले उठानी पड़ती है। ऐसे में आर्थिक चुनौतियों के साथ बच्चों की शिक्षा और भविष्य की चिंता भी उनके सामने रहती है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार एकल महिलाओं पर विशेष ध्यान देने की तैयारी कर रही है। हालांकि, नई योजना के तहत कितनी आर्थिक सहायता मिलेगी, पात्रता की शर्तें क्या होंगी और योजना कब से शुरू होगी, इसकी आधिकारिक घोषणा अभी सामने नहीं आई है। अगर सरकार की यह पहल योजना के रूप में लागू होती है, तो इससे जरूरतमंद एकल महिलाओं और उनके बच्चों को राहत मिलने की उम्मीद है।


