मुंबई : मुंबई जैसे महानगर में पानी की जरूरत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अगर भविष्य में बारिश कम हुई या जलाशयों में पानी का स्तर घटा, तो पानी की किल्लत लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है। इसी आशंका को देखते हुए मुंबई महानगरपालिका ने अब शहर के पुराने कुओं को फिर से उपयोग में लाने की योजना बनाई है। बदलते बारिश के पैटर्न और भविष्य में संभावित अल नीनो के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है।
पुराने कुओं की फिर लौटेगी उपयोगिता
मुंबई को पानी की आपूर्ति करने वाले जलाशयों में पानी का भंडार, बारिश की अनिश्चितता और भविष्य में पानी की बढ़ती मांग को देखते हुए कुओं का पुनरुद्धार महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शहर के कई इलाकों में कुओं का लंबे समय से नियमित इस्तेमाल नहीं हो रहा है। कहीं रखरखाव की कमी है, तो कहीं गाद जमा होने और पानी की गुणवत्ता से जुड़ी समस्याओं के कारण ये कुएं अनुपयोगी हो गए हैं। ऐसे में इन कुओं की स्थिति की जांच कर उनकी सफाई, मरम्मत और जरूरी सुधार किए जाएंगे। इससे उपलब्ध जलस्रोतों का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।
विभागवार निधि, काम में तेजी लाने के निर्देश
कुओं के पुनरुद्धार के काम को गति देने के लिए विभागवार निधि उपलब्ध कराने और योजना पर तेजी से काम करने के निर्देश स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने महानगरपालिका प्रशासन को दिए हैं। उनका जोर इस बात पर है कि लंबे समय से उपेक्षित पड़े कुओं की स्थिति सुधारी जाए और उन्हें दोबारा उपयोग के योग्य बनाया जाए। इस दिशा में मुलुंड के नवघर इलाके में कई वर्षों से इस्तेमाल नहीं हो रहे एक कुएं का पुनरुद्धार किया गया है। इस काम के लिए प्रभाकर शिंदे ने पहल की थी।
पानी की बचत के साथ पुराने जलस्रोतों पर भी ध्यान
मुंबई में पानी की जरूरत पूरी करने के लिए केवल बड़े जलाशयों पर निर्भर रहने के बजाय पुराने जलस्रोतों को भी उपयोगी बनाना जरूरी है। कुओं का पुनरुद्धार भविष्य में संभावित पानी की कमी से निपटने की तैयारी का एक हिस्सा हो सकता है। हालांकि, इसके लिए कुओं के पानी की गुणवत्ता की जांच और नियमित देखभाल भी जरूरी होगी। अब देखना होगा कि महानगरपालिका की यह योजना कितने कुओं को दोबारा उपयोग में लाती है और मुंबई की जल व्यवस्था को मजबूत करने में कितनी मददगार साबित होती है।


