मुंबई : महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी जमीन के आवंटन से जुड़ी नीति में बड़ा बदलाव किया है। छोटे, संकरे, अनुपयोगी और रास्ता नहीं होने के कारण इस्तेमाल में न आ सकने वाले सरकारी भूखंडों के आवंटन की सीमा बढ़ाने को मंजूरी दी गई है। अब ऐसे भूखंड आसपास की जमीन के मालिकों को आवंटित करते समय क्षेत्रफल की सीमा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक की जा सकेगी। इस फैसले से उन जमीनों के उपयोग का रास्ता खुल सकता है, जो अब तक अपने छोटे आकार या पहुंच मार्ग की कमी के कारण बेकार पड़ी थीं।
10% की सीमा बढ़ाकर 25% करने का फैसला
राज्य सरकार ने 5 अगस्त 2025 को छोटे और स्वतंत्र रूप से निर्माण के लिए अनुपयुक्त सरकारी भूखंडों के वितरण के लिए नीति निर्धारित की थी। इसके तहत आवंटित किए जाने वाले भूखंड का क्षेत्रफल, संबंधित भूखंडधारक की कुल जमीन के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए था। हालांकि, इस सीमा को बढ़ाने की मांग जनप्रतिनिधियों की ओर से की जा रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अब यह सीमा बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने का फैसला लिया है। इससे पात्र आसपास के भूखंडधारकों को पहले की तुलना में अधिक क्षेत्रफल की सरकारी जमीन आवंटित करने का विकल्प मिल सकेगा।
निर्माण की अनुमति नहीं, तो भी लागू होंगी शर्तें
सरकार ने उन भूखंडों को भी नीति में शामिल किया है, जिन पर मौजूदा नियमों के अनुसार निर्माण करना संभव नहीं है। ऐसे मामलों में सरकार की मंजूरी से निर्धारित शर्तों में छूट दी जा सकेगी। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर आवंटित भूखंड पर निर्माण की अनुमति मिल जाएगी। जिन भूखंडों पर निर्माण की अनुमति नहीं होगी, उन्हें स्थायी रूप से खुली जगह (Open Space) के रूप में बनाए रखना अनिवार्य होगा।
भविष्य में नियम बदले तो वसूली का भी प्रावधान
इस नीति में भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक और महत्वपूर्ण शर्त जोड़ी गई है। यदि आगे चलकर विकास नियमों में बदलाव होता है और संबंधित भूखंड पर निर्माण की अनुमति मिल जाती है, तो सरकार प्रचलित दर के अनुसार अंतर की राशि और अधिमूल्य वसूल सकेगी। यानी जमीन का आवंटन होने के बाद भी भविष्य में निर्माण की अनुमति मिलने पर आर्थिक शर्तें लागू हो सकती हैं।
मंत्रिमंडल की बैठक में मिली मंजूरी
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही महाराष्ट्र जमीन राजस्व (सरकारी जमीन का निपटान) नियम, 1971 के नियम 37 और 37-अ में संशोधन करने का भी निर्णय लिया गया। कुल मिलाकर, सरकार के इस फैसले का उद्देश्य ऐसी सरकारी जमीनों के व्यवस्थित उपयोग का रास्ता खोलना है, जो छोटे आकार, अनुपयोगी बनावट या पहुंच मार्ग की कमी के कारण लंबे समय से उपयोग में नहीं लाई जा सकती थीं। हालांकि, जमीन का आवंटन और उस पर निर्माण की अनुमति संबंधित नियमों व शर्तों के अधीन ही होगी।


