पुणे : दिवाली का त्योहार नजदीक है। घर की खरीदारी, बच्चों की खुशियां और त्योहार के बढ़ते खर्चों के बीच पुणे महानगरपालिका और पीएमपी के कर्मचारियों को अपने दिवाली बोनस का इंतजार है। लेकिन इस बार आचार संहिता के कारण बोनस पर फैसला अटक गया है। अब कर्मचारियों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द कोई रास्ता निकालेगा, ताकि त्योहार से पहले उन्हें राहत मिल सके।
31 अक्टूबर तक आचार संहिता, बढ़ी चिंता
विधान परिषद चुनाव के चलते 31 अक्टूबर तक आचार संहिता लागू है। ऐसे में दिवाली बोनस और सानुग्रह अनुदान को मंजूरी देने की प्रक्रिया प्रशासन के लिए चुनौती बन गई है। दिवाली 5 नवंबर से शुरू हो रही है। ऐसे में कर्मचारियों के लिए यह जानना जरूरी हो गया है कि बोनस की रकम कितनी होगी और उनके खातों में कब जमा होगी।
पिछले साल मिला था इतना बोनस
पुणे महानगरपालिका में हर साल अधिकारियों और कर्मचारियों को दिवाली के अवसर पर सानुग्रह अनुदान दिया जाता है। पिछले साल कर्मचारियों को मूल वेतन और महंगाई भत्ते के आधार पर 8.33 प्रतिशत के साथ 25 हजार रुपये का अनुदान दिया गया था। हालांकि, इस साल अभी तक बोनस को लेकर आधिकारिक परिपत्र जारी नहीं हुआ है। इसी वजह से कर्मचारियों के बीच असमंजस बना हुआ है।
175 करोड़ रुपये तक का खर्च
पुणे महानगरपालिका के करीब 18 हजार कर्मचारियों को बोनस और सानुग्रह अनुदान देने के लिए लगभग 150 से 175 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। वहीं, पीएमपी कर्मचारियों के लिए करीब 20 करोड़ रुपये की व्यवस्था की जाती है। आमतौर पर पीएमपी के बोनस से जुड़ा निर्णय स्थायी समिति के प्रस्ताव के माध्यम से लिया जाता है, लेकिन आचार संहिता लागू होने के कारण इस बार प्रक्रिया में बाधा आ रही है।
आयुक्त से चर्चा के बाद निकलेगा रास्ता
महानगरपालिका आयुक्त नवल किशोर राम के जर्मनी दौरे से लौटने के बाद इस मामले पर चर्चा की जाएगी। सोमवार, 12 अक्टूबर को आयुक्त के साथ बातचीत कर आगे की दिशा तय करने की तैयारी है। बोनस का प्रस्ताव जिलाधिकारी के माध्यम से विभागीय आयुक्त के पास भेजकर आवश्यक मंजूरी लेने का विकल्प भी सामने है। हालांकि, आचार संहिता के नियमों के तहत इसकी अनुमति मिलती है या नहीं, इस पर आगे की प्रक्रिया निर्भर करेगी। महानगरपालिका की लेखा एवं वित्त अधिकारी उल्का कळसकर के अनुसार, आचार संहिता लागू होने के कारण दिवाली बोनस के संबंध में मार्गदर्शन लेना जरूरी होगा। इसके लिए आयुक्त के साथ चर्चा की जाएगी।
त्योहार से पहले फैसले की उम्मीद
दिवाली केवल रोशनी और मिठाइयों का त्योहार नहीं, बल्कि परिवार की खुशियों और सालभर की मेहनत के बाद कुछ खास करने का अवसर भी है। ऐसे में बोनस की रकम कर्मचारियों के घरेलू बजट का अहम हिस्सा होती है। अब पुणे महानगरपालिका और पीएमपी के कर्मचारी इसी उम्मीद में हैं कि प्रशासन जल्द निर्णय लेगा और दिवाली से पहले उन्हें बोनस को लेकर स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।


