नागपुर : दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के मोतीबाग वर्कशॉप में काम से हटाए गए कामगारों ने अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल शुरू कर दी है। कामगारों का आरोप है कि वेतन, श्रम नियमों, कथित पैसों की वसूली और ठेकेदारों की मनमानी को लेकर शिकायतें उठाने के बाद उन्हें काम से हटा दिया गया। इससे उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। कामगारों की समस्याओं को लेकर शिवसेना के नितिन तिवारी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मोतीबाग वर्कशॉप के मुख्य कारखाना प्रबंधक से मुलाकात की। इस दौरान कामगारों की शिकायतों के साथ स्थानीय युवाओं के रोजगार का मुद्दा भी उठाया गया।
शिकायत के बाद काम से हटाने का आरोप
पीड़ित कामगारों का कहना है कि उन्होंने कथित जबरन पैसे की वसूली, वेतन और श्रम नियमों के उल्लंघन तथा ठेकेदारों की मनमानी को लेकर शिकायतें की थीं। उनका आरोप है कि शिकायतों के बाद उन्हें काम से हटा दिया गया। इसके विरोध में उन्होंने भूख हड़ताल शुरू की है। आंदोलन की जानकारी जरीपटका पुलिस स्टेशन, रेलवे प्रबंधन और संबंधित प्रशासन को दी गई है।
स्थानीय युवाओं को रोजगार की मांग
शिवसेना ने रेलवे के कामों में स्थानीय भूमिपुत्र युवाओं को रोजगार के अवसर देने की मांग की है। कामगारों की ओर से कुछ ठेकेदारों पर रेलवे अधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत, पैसों की कथित वसूली और रोजगार के नाम पर मनमानी के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। नितिन तिवारी ने मुख्य कारखाना प्रबंधक श्री विश्वलाल जी और डिप्टी श्री अमित मित्रा जी से मुलाकात कर कामगारों की समस्याओं को सामने रखा। इस दौरान आशीष हाड़गे, ललित बावनकर, कार्तिक करोसिया सहित काम से हटाए गए कामगार मौजूद रहे।
शिवसेना की मांग है कि काम से हटाए गए कामगारों को वापस काम पर लिया जाए, स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर दिए जाएं और पैसों की कथित वसूली, श्रम नियमों के उल्लंघन तथा ठेकेदारों की कथित मनमानी की जांच की जाए। नितिन तिवारी ने कहा कि यदि कामगारों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया और स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिला, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।


