नागपुर : हाईवे पर टोल प्लाजा पर समय बचाने के लिए शुरू की गई फास्टैग सुविधा अब गलत शुल्क कटौती को लेकर सवालों के घेरे में है। जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच देशभर में फास्टैग के जरिए किए गए 17 लाख 66 हजार से ज्यादा लेनदेन में गलत यूजर शुल्क वसूले जाने की जानकारी सामने आई है। शिकायत मिलने के बाद संबंधित वाहन चालकों को उनकी रकम वापस कर दी गई, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया ने डिजिटल टोल व्यवस्था की सटीकता पर सवाल खड़े किए हैं।
646 करोड़ लेनदेन में लाखों बार गलत कटौती
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में देशभर के हाईवे पर फास्टैग के जरिए करीब 646 करोड़ लेनदेन हुए। इनमें से 17.66 लाख लेनदेन में गलत शुल्क कटौती दर्ज की गई। कुल लेनदेन की तुलना में यह आंकड़ा 0.03 प्रतिशत है, लेकिन वाहन चालकों के लिए हर गलत कटौती सीधे उनकी जेब से जुड़ी है।
रकम वापस मिलती है, लेकिन शिकायत जरूरी
अगर फास्टैग से गलत टोल शुल्क कट जाता है और जांच में इसकी पुष्टि होती है, तो संबंधित बैंक के माध्यम से राशि वाहन चालक के खाते में वापस कर दी जाती है। हालांकि, इसके लिए वाहन चालक को खुद जागरूक होकर शिकायत दर्ज करानी पड़ती है। ऐसे में फास्टैग इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों के लिए अपने लेनदेन पर नजर रखना जरूरी हो जाता है।
निगरानी के बावजूद गलत वसूली कैसे?
फास्टैग से जुड़ी ईटीसी व्यवस्था की निगरानी टोल मॉनिटरिंग एंड कंट्रोल सेंटर यानी टीएमसीसी के माध्यम से की जाती है। सिस्टम इंटीग्रेटर्स, बैंकों और यूजर शुल्क वसूलने वाली संस्थाओं के बीच समन्वय भी किया जाता है। इसके बावजूद लाखों लेनदेन में गलत शुल्क कटने का मामला सामने आया है। ऐसे में सवाल यही है कि पूरी निगरानी व्यवस्था के बावजूद वाहन चालकों के खातों से गलत राशि आखिर कैसे कट गई?


