मुंबई : मुंबई में वॉटर मेट्रो शुरू होने का इंतजार भले ही यात्रियों को हो, लेकिन इस सेवा की असली तैयारी पानी में नाव उतारने से पहले शुरू होगी। मुंबई की खाड़ियों, समुद्र और बंदरगाह क्षेत्रों में प्रस्तावित जलमार्गों को सुरक्षित बनाने के लिए समुद्र की गहराई, समुद्र तल की स्थिति, गाद और ज्वार-भाटा जैसे कई पहलुओं का तकनीकी अध्ययन किया जाएगा। यानी मुंबई वॉटर मेट्रो की शुरुआत से पहले खुद जलमार्गों की ‘परीक्षा’ होगी।
केंद्र सरकार के पत्र सूचना कार्यालय की ओर से पत्रकारों के लिए केरल के कोच्चि में अध्ययन दौरे का आयोजन किया गया। सोमवार को कोच्चि वॉटर मेट्रो की कार्यप्रणाली और वहां की सुविधाओं का जायजा लिया गया। आधुनिक टर्मिनल, इलेक्ट्रिक नावें, सुरक्षित चढ़ने-उतरने की व्यवस्था और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों से कनेक्टिविटी ने यह दिखाया कि जल परिवहन शहर की रोजमर्रा की आवाजाही का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
समुद्र तल की स्थिति बनेगी बड़ी चुनौती
मुंबई वॉटर मेट्रो के विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) को महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड को सौंपा गया है। प्रस्तावित जलमार्गों के लिए पानी की गहराई और समुद्र तल की स्थिति का अध्ययन महत्वपूर्ण होगा। जिन क्षेत्रों में अधिक गाद जमा होती है, वहां ड्रेजिंग की जरूरत पड़ेगी। वहीं समुद्र तल चट्टानी होने पर रॉक ड्रेजिंग के जरिए आवश्यक गहराई तैयार करनी पड़ सकती है। ज्वार-भाटा के कारण पानी का स्तर लगातार बदलता है। ऐसे में नावों की आवाजाही, मोड़ वाले स्थानों और टर्मिनल तक पहुंचने वाले मार्ग को भी ध्यान में रखकर जलमार्ग तैयार करने होंगे। सालभर सुरक्षित सेवा बनाए रखने के लिए इन जलमार्गों की गहराई और स्थिति को लगातार बनाए रखना भी बड़ी चुनौती होगी।
250 किलोमीटर का जलमार्ग नेटवर्क
प्रस्तावित योजना के अनुसार मुंबई क्षेत्र में करीब 250 किलोमीटर जलमार्ग विकसित करने का प्रस्ताव है। इसमें 21 मार्ग, 49 टर्मिनल और 207 नावें शामिल हैं। वैतरणा, वसई, मनोरी, ठाणे, पनवेल, करंजा और मुंबई बंदरगाह क्षेत्र के जलमार्गों को भी इस नेटवर्क में शामिल करने पर विचार किया गया है। इस नेटवर्क की सफलता सिर्फ नावों पर निर्भर नहीं होगी। टर्मिनल तक सुरक्षित जलमार्ग, दिशासूचक व्यवस्था और नावों की नियमित आवाजाही के लिए पर्याप्त गहराई बनाए रखना भी उतना ही जरूरी होगा।
पुराने जलमार्गों को भी मिलेगी नई दिशा
ठाणे खाड़ी, वसई खाड़ी और उल्हास नदी क्षेत्र में पहले से प्रस्तावित जल परिवहन योजनाओं को भी इस व्यापक नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। राष्ट्रीय जलमार्ग-53 के तहत भायंदर, काल्हेर, कोलशेत और डोंबिवली में जेट्टी विकसित करने का नियोजन है। आगे मीठबंदर, मुलुंड, ऐरोली और वाशी में भी काम प्रस्तावित है। ठाणे खाड़ी में गाद निकालने के काम से लेकर ठाणे और वसई खाड़ी को जोड़ने वाली जल परिवहन योजना तक, इन परियोजनाओं को व्यापक वॉटर मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।
कोच्चि का मॉडल, लेकिन मुंबई की जरूरत अलग
कोच्चि में बैकवॉटर का बड़ा नेटवर्क है, जबकि मुंबई की भौगोलिक स्थिति काफी अलग है। यहां समुद्र, खाड़ियां, बंदरगाह क्षेत्र, ज्वार-भाटा, गाद और कुछ जगहों पर चट्टानी समुद्र तल जैसी अलग-अलग परिस्थितियां हैं। इसलिए कोच्चि का अनुभव मुंबई के लिए मार्गदर्शक जरूर बन सकता है, लेकिन मुंबई के हर जलमार्ग की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग तकनीकी योजना बनानी होगी। यही तैयारी मुंबई वॉटर मेट्रो को सुरक्षित और नियमित बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
6,066 करोड़ के प्रोजेक्ट पर नजर
मुंबई वॉटर मेट्रो के लिए करीब 6,066 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है। इसमें जलमार्ग, टर्मिनल, नावें और अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाओं का विकास शामिल है। मुंबई और सिंधुदुर्ग में वॉटर मेट्रो की संभावनाओं को देखते हुए कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड (KMRL) के अधिकारियों ने प्रस्तावित जलमार्गों का निरीक्षण भी किया है। महाराष्ट्र सरकार के अनुरोध पर हुई इस पाहणी के आधार पर अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है।
आने वाले समय में मुंबई के लिए वॉटर मेट्रो सिर्फ पानी पर चलने वाली नावों की सेवा नहीं, बल्कि लोकल, मेट्रो और बस परिवहन से जुड़ी एक नई सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के रूप में सामने आ सकती है। लेकिन उससे पहले मुंबई के जलमार्गों को सुरक्षित और सालभर उपयोग के लायक बनाना सबसे जरूरी कदम होगा।


