नागपुर विश्वविद्यालय का होगा डिजिटल मेकओवर, अब अपनी IT कंपनी बनाने की तैयारी

विभागों के सॉफ्टवेयर होंगे आपस में कनेक्ट; पुरानी रिकॉर्ड्स भी होंगे डिजिटल, पूरी व्यवस्था तैयार होने में लगेंगे 3-4 साल

नागपुर : राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में डिजिटल व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में अलग-अलग स्तर पर चल रहे सॉफ्टवेयर को एक-दूसरे से जोड़कर एकीकृत डिजिटल सिस्टम तैयार करने की योजना है। इसके लिए विश्वविद्यालय के नाम से ‘सेक्शन 8’ IT कंपनी स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर ने बताया कि भविष्य में विश्वविद्यालय की अपनी डिजिटल प्रणाली, सर्वर और सॉफ्टवेयर विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।

बैठक में मनमोहन वाजपेयी ने IT सेल की ओर से दी गई जानकारी को अधूरी बताते हुए परीक्षा और मूल्यांकन विभाग के डिजिटायजेशन पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि विश्वविद्यालय के कितने विभागों का डिजिटायजेशन पूरा हो चुका है और कितना काम अभी बाकी है, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने रखी जानी चाहिए। परीक्षा विभाग की व्यवस्था में अब भी कई स्तर पर दिक्कतें होने का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने विश्वविद्यालय की अपनी डिजिटल व्यवस्था विकसित करने के पहले के निर्णय पर भी प्रगति की जानकारी मांगी।

इस पर कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर ने बताया कि अलग-अलग कंपनियों के सॉफ्टवेयर के डेमो लिए जा रहे हैं और उनकी उपयोगी सुविधाओं का अध्ययन किया जा रहा है। इसके बाद विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों की जरूरतों के अनुसार इन सॉफ्टवेयर को आपस में जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य धीरे-धीरे बाहरी कंपनियों पर निर्भरता कम करना और विश्वविद्यालय के स्वामित्व वाली स्वतंत्र डिजिटल व्यवस्था तैयार करना है।

पुरानी फाइलें भी होंगी डिजिटल

डिजिटल व्यवस्था का मतलब सिर्फ मौजूदा विद्यार्थियों का डेटा कंप्यूटर में दर्ज करना नहीं है। विश्वविद्यालय में वर्षों से संभालकर रखे गए पुराने रिकॉर्ड को भी डिजिटल करना जरूरी है। खासकर परीक्षा विभाग की पुरानी नोंदें अभी पूरी तरह डिजिटल नहीं हुई हैं। इस काम के लिए भी अलग-अलग कंपनियों के डेमो लिए गए हैं और उनकी तकनीक का अध्ययन किया जा रहा है। कुलगुरु ने स्पष्ट किया कि पूरी डिजिटल व्यवस्था को तैयार कर उसे पूरी तरह कार्यान्वित करने में तीन से चार साल का समय लग सकता है। यानी यह बदलाव एक साथ नहीं, बल्कि चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।

पुणे विश्वविद्यालय की व्यवस्था का होगा अध्ययन

डिजिटल व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पुणे विश्वविद्यालय जैसी संस्थाओं की कार्यप्रणाली का भी अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए विश्वविद्यालय की एक टीम भेजने की तैयारी है। साथ ही डिजिटायजेशन की पूरी प्रक्रिया का अध्ययन करने और आगे की दिशा तय करने के लिए पांच सदस्यीय टास्क फोर्स गठित करने का प्रस्ताव है। अगर यह योजना तय दिशा में आगे बढ़ती है, तो आने वाले वर्षों में विद्यार्थियों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के लिए कई प्रक्रियाएं एक ही डिजिटल सिस्टम से जुड़ सकती हैं। खासकर परीक्षा और पुराने रिकॉर्ड से जुड़े कामों में इसका असर देखने को मिल सकता है।

 

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