नागपुर : किसानों को खेती, फसल और सरकारी कृषि योजनाओं की जानकारी समय पर मिलना बेहद जरूरी है। लेकिन कृषि विभाग के नए आकृतिबंध को लेकर अब यही सवाल उठने लगा है कि जब कृषि अधिकारियों और कर्मचारियों के पास बैठने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होगी, तो वे किसानों तक कितनी आसानी से पहुंच पाएंगे?
कृषि विभाग के वर्ष 2026 के नए आकृतिबंध में मंडल कृषि अधिकारी और उपविभागीय कृषि अधिकारी कार्यालयों को बंद करने का निर्णय लिया गया है। इन कार्यालयों में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी अब क्रमशः तालुका कृषि अधिकारी और जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी कार्यालयों में बैठेंगे। इससे पहले से मौजूद कार्यालयों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ने से जगह की समस्या गंभीर होने की संभावना है।
एक ही कार्यालय में 50-60 कर्मचारी
वर्तमान में प्रत्येक तालुका कृषि अधिकारी कार्यालय में करीब 40 से 45 तकनीकी और गैर-तकनीकी अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं। वहीं, उपविभागीय कृषि अधिकारी कार्यालय में 6 से 8 तथा जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी कार्यालय में करीब 35 से 40 अधिकारी-कर्मचारी होते हैं। मंडल कृषि अधिकारी कार्यालय बंद होने के बाद वहां के अधिकारी-कर्मचारी तालुका कार्यालय में आएंगे। ऐसे में कई कार्यालयों में कर्मचारियों की संख्या और बढ़ जाएगी। इसी तरह उपविभागीय कार्यालय बंद होने के बाद वहां के अधिकारी जिला स्तर पर बैठेंगे। इससे कुछ कार्यालयों में 50 से 60 तक अधिकारी-कर्मचारियों के बैठने की स्थिति बन सकती है। सबसे बड़ी बात यह है कि कृषि विभाग के पास अभी भी कई जगहों पर अपने हक और मालिकाना हक वाले कार्यालय नहीं हैं। ऐसे में नए आकृतिबंध के बाद कार्यालयों में जगह की समस्या और बढ़ने की आशंका है।
किसानों को किससे मिलेगी खेती की जानकारी?
मंडल स्तर पर कृषि अधिकारी किसानों के काफी करीब रहते हैं। फसल संबंधी समस्या, कीट प्रकोप, सरकारी योजनाओं की जानकारी या कृषि विभाग की किसी योजना का लाभ लेने के लिए किसान स्थानीय स्तर पर अधिकारियों से संपर्क करते हैं। लेकिन अब मंडल कार्यालय ही बंद होने से किसानों को तालुका मुख्यालय तक जाना पड़ सकता है। विशेषकर दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों के लिए यह अतिरिक्त दूरी और परेशानी का कारण बन सकती है। किसानों के लिए सवाल सिर्फ अधिकारी के कार्यालय में मौजूद होने का नहीं, बल्कि जरूरत के समय सही कृषि मार्गदर्शन आसानी से उपलब्ध होने का है।
5,090 पदों की कटौती
कृषि विभाग के वर्ष 2009 के आकृतिबंध में कुल 28,566 पद थे। वर्ष 2026 के नए आकृतिबंध में यह संख्या घटाकर 23,476 कर दी गई है। यानी कुल 5,090 पद कम किए गए हैं। राज्य में वर्तमान में 34 जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी, 78 उपविभागीय कृषि अधिकारी, 354 तालुका कृषि अधिकारी और 654 मंडल कृषि अधिकारी कार्यरत हैं। ऐसे में पदों में कमी और कार्यालयों के एकीकरण का असर विभाग के कामकाज पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
पदोन्नति के अवसरों की भी कमी
कृषि विभाग में उपविभागीय कृषि अधिकारी, तालुका कृषि अधिकारी और मंडल कृषि अधिकारी जैसे पद एमपीएससी के माध्यम से भरे जाते हैं। अन्य विभागों में इसी स्तर के पदों को क्लास-वन का दर्जा दिया जाता है, जबकि कृषि विभाग में इन्हें क्लास-टू के रूप में रखा गया है। कृषि अधिकारियों के अनुसार, अन्य विभागों में कर्मचारियों को कुछ वर्षों की सेवा के बाद पदोन्नति के अवसर मिलते हैं। वहीं कृषि विभाग में पदोन्नति की संभावनाएं अपेक्षाकृत कम हैं। पदोन्नति मिलने पर भी कई बार क्लास में बदलाव का लाभ नहीं मिल पाता।
तकनीकी कर्मचारियों की वेतनश्रेणी पर सवाल
कृषि विभाग में करीब 84 प्रतिशत पद तकनीकी और 16 प्रतिशत पद गैर-तकनीकी संवर्ग के हैं। गैर-तकनीकी संवर्ग के अधिकारी-कर्मचारियों की वेतनश्रेणी में बढ़ोतरी की गई है, जबकि तकनीकी संवर्ग की वेतनश्रेणी में बदलाव नहीं किया गया। कृषि अधिकारियों का कहना है कि कृषि विभाग मूल रूप से तकनीकी विभाग है। किसानों को फसल, मिट्टी, कीट और आधुनिक कृषि तकनीक से जुड़ी जानकारी देने में तकनीकी कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में तकनीकी मनुष्यबळ का उचित इस्तेमाल होना जरूरी है। इसी कारण विभाग के कुछ अधिकारियों के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं कृषि विभाग का काम किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देने के बजाय सिर्फ रिपोर्टिंग और कागजी कार्रवाई तक सीमित तो नहीं होता जा रहा?
किसान और अधिकारी दोनों के लिए चुनौती
एक तरफ पदों की संख्या घट रही है, दूसरी तरफ कई कार्यालयों को एक ही जगह समेटने की तैयारी है। ऐसे में इसका सीधा असर विभागीय कामकाज और किसानों तक पहुंचने वाली सेवाओं पर पड़ सकता है। किसानों को योजनाओं का लाभ और खेती से जुड़ी सही जानकारी समय पर देने के लिए स्थानीय स्तर पर कृषि अधिकारियों की उपलब्धता और पर्याप्त मनुष्यबळ जरूरी है। इसलिए नए आकृतिबंध को लागू करते समय केवल प्रशासनिक व्यवस्था ही नहीं, बल्कि किसानों की सुविधा को भी केंद्र में रखना जरूरी होगा।


