मुंबई : भारतीय शेयर बाजार में अब सिर्फ विदेशी निवेशकों की चाल पर नजर नहीं है। देश के आम निवेशक और घरेलू म्यूचुअल फंड बाजार में अपनी पकड़ लगातार मजबूत कर रहे हैं। जून 2026 को समाप्त तिमाही के आंकड़ों से पता चलता है कि घरेलू म्यूचुअल फंड (DMF) और व्यक्तिगत निवेशकों की हिस्सेदारी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। खास बात यह है कि व्यक्तिगत निवेशकों की हिस्सेदारी लगातार सातवीं तिमाही में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) से अधिक रही।
आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में घरेलू म्यूचुअल फंड ने शेयर बाजार में रिकॉर्ड 1.42 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया। यह लगातार 21वीं तिमाही है, जब घरेलू म्यूचुअल फंड का निवेश शुद्ध रूप से सकारात्मक रहा है।
SIP में भी बढ़ा भरोसा
घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी के पीछे SIP का बड़ा योगदान माना जा रहा है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में SIP के जरिए औसत मासिक निवेश बढ़कर 31,283 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह तिमाही आधार पर 1 फीसदी और सालाना आधार पर 16.5 फीसदी की बढ़ोतरी है। इसका सीधा असर शेयर बाजार में घरेलू म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी पर दिखाई दे रहा है। NSE में सूचीबद्ध कंपनियों में DMF की हिस्सेदारी बढ़कर रिकॉर्ड 11.6 फीसदी हो गई है। वहीं निफ्टी 50 में यह हिस्सेदारी 14.6 फीसदी और निफ्टी 500 में 12.2 फीसदी पहुंच गई।
आम निवेशकों की हिस्सेदारी भी रिकॉर्ड स्तर पर
जून 2026 में NSE में सूचीबद्ध कंपनियों में व्यक्तिगत निवेशकों की प्रत्यक्ष हिस्सेदारी बढ़कर 9.5 फीसदी हो गई। निफ्टी 50 में यह 7.8 फीसदी और निफ्टी 500 में 8.4 फीसदी रही। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में व्यक्तिगत निवेशक एक बार फिर NSE के सेकेंडरी मार्केट में शुद्ध खरीदार बने। इस दौरान उनकी शुद्ध खरीद करीब 42,700 करोड़ रुपये रही, जो छह तिमाहियों में सबसे ज्यादा है।
व्यक्तिगत निवेशकों की प्रत्यक्ष होल्डिंग का मूल्य भी 19.3 फीसदी बढ़कर 44.6 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं प्रत्यक्ष निवेश और म्यूचुअल फंड के जरिए की गई अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी को मिलाकर घरेलू निवेशकों की कुल हिस्सेदारी NSE के कुल बाजार पूंजीकरण की रिकॉर्ड 19.3 फीसदी हो गई।
विदेशी निवेश पर निर्भरता हो रही कम
सबसे अहम बात यह है कि घरेलू निवेशकों की ताकत बढ़ने से भारतीय बाजार का विदेशी निवेशकों पर निर्भर रहना धीरे-धीरे कम हो रहा है। व्यक्तिगत निवेशकों की हिस्सेदारी लगातार सातवीं तिमाही में FPI से अधिक रही। जून 2026 में दोनों के बीच यह अंतर बढ़कर 4.2 प्रतिशत अंक हो गया। बाजार में तेजी के कारण वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में घरेलू शेयर संपत्ति में अनुमानित 12.2 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। अप्रैल 2020 से अब तक घरेलू निवेशकों की संपत्ति में करीब 56 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हो चुकी है।
बचत का रुख भी शेयर बाजार की ओर
जानकारों के मुताबिक, SIP का बढ़ता चलन, डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म की आसान उपलब्धता, वित्तीय जागरूकता, ब्याज दरों में बदलाव और शेयर बाजार के बेहतर प्रदर्शन ने भारतीय परिवारों की बचत का रुख बदलने में अहम भूमिका निभाई है। पहले जहां घरेलू बचत का बड़ा हिस्सा पारंपरिक साधनों में रखा जाता था, वहीं अब धीरे-धीरे म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेश बढ़ रहा है। यही वजह है कि भारतीय शेयर बाजार में ‘देसी पैसा’ अब एक मजबूत ताकत बनकर उभर रहा है। कुल मिलाकर, जून 2026 की तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय शेयर बाजार की तस्वीर बदल रही है। विदेशी निवेशकों की भूमिका अब भी महत्वपूर्ण है, लेकिन घरेलू म्यूचुअल फंड और आम निवेशकों की बढ़ती हिस्सेदारी बाजार को एक मजबूत घरेलू आधार दे रही है।


