नागपुर : बारिश में कुछ दिनों की कमी के बाद मानसून एक बार फिर सक्रिय होने के संकेत दे रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 20 से 24 अगस्त के बीच पूर्व और मध्य भारत में बारिश का जोर बढ़ सकता है। इस दौरान उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। महाराष्ट्र में भी मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, पुणे और नासिक में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है। वहीं, मराठवाड़ा के कुछ जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है।
बंगाल की खाड़ी से बदलेगा मौसम
मानसून के दोबारा सक्रिय होने के पीछे बंगाल की खाड़ी से जमीन की ओर बढ़ रहा कम दबाव का क्षेत्र और मानसून ट्रफ की संभावित स्थिति को प्रमुख कारण माना जा रहा है। समुद्र से आने वाली नम हवाओं के कारण पूर्व और मध्य भारत में बादल तेजी से विकसित हो सकते हैं। मौसम विभाग की उपग्रह तस्वीरों में भी पूर्व भारत के ऊपर घने बादलों का क्षेत्र दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और आसपास के इलाकों में गरज-चमक वाले बादल बनने से बारिश का दौर तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
पूर्वी भारत में भारी बारिश का खतरा
आने वाले दिनों में पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश के साथ उत्तराखंड के तराई क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। लगातार बारिश होने पर निचले इलाकों में जलभराव, स्थानीय बाढ़ और नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी जैसी स्थिति बन सकती है।
उत्तर भारत में भी मिलेगी राहत
मानसून की गतिविधि बढ़ने से पंजाब, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर के कुछ हिस्सों में जारी शुष्क मौसम से भी राहत मिलने की उम्मीद है। मानसून ट्रफ के दोबारा उत्तर की ओर बढ़ने के साथ इन क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
महाराष्ट्र में कैसा रहेगा मौसम?
महाराष्ट्र में कोंकण और पश्चिमी महाराष्ट्र के कुछ जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। मराठवाड़ा में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। वहीं, नागपुर सहित विदर्भ के मौसम पर स्थानीय परिस्थितियों का असर रहेगा, इसलिए अगले कुछ दिनों के मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखना जरूरी होगा।
मानसून की यह सक्रियता उन राज्यों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां अब तक बारिश की कमी रही है। 20 से 24 अगस्त के दौरान होने वाली बारिश से सीजन के कुल वर्षा आंकड़ों में सुधार की उम्मीद है। हालांकि, अत्यधिक बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव और स्थानीय बाढ़ की स्थिति से सावधानी बरतना जरूरी होगा।


