पुणे : महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) की राज्यसेवा परीक्षा 2024 में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) आरक्षण के क्रियान्वयन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में एडवोकेट गुणरत्न सदावर्ते ने SIT या स्वतंत्र समिति से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि आरक्षण लागू करने में कथित त्रुटियों के कारण पात्र विद्यार्थियों के साथ अन्याय हुआ है। शुक्रवार को आयोजित पत्रकार परिषद में सदावर्ते ने कहा कि पूरी चयन प्रक्रिया को प्रारंभिक परीक्षा से नए सिरे से शुरू किया जाना चाहिए, ताकि प्रभावित विद्यार्थियों को न्याय मिल सके।
हाईकोर्ट के आदेश का दिया हवाला
सदावर्ते ने मुंबई हाईकोर्ट के 6 अगस्त के अंतरिम आदेश का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने संबंधित 10 फीसदी सीटों को अंतिम फैसले के अधीन रखते हुए फिलहाल रिक्त रखने के निर्देश दिए हैं। उनके मुताबिक, इससे EWS आरक्षण के क्रियान्वयन को लेकर उठे सवाल और गंभीर हो गए हैं। उन्होंने MPSC अध्यक्ष भीमनवार से अपील की कि वे किसी भी राजनीतिक या सामाजिक दबाव में आए बिना विद्यार्थियों के हित में ठोस भूमिका निभाएं।
‘गरीबों और आरक्षण के अन्याय के खिलाफ खड़ा रहूंगा’
सदावर्ते ने गुलाबराव पाटील के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वे किसी के दबाव में काम नहीं करते और जहां गरीबों तथा आरक्षण से जुड़े विद्यार्थियों के साथ अन्याय होगा, वहां वे मजबूती से आवाज उठाएंगे।
अमृत के विद्यार्थियों के लिए भी न्याय की मांग
सदावर्ते ने महाराष्ट्र संशोधन, उन्नती व प्रशिक्षण प्रबोधिनी (AMRUT) को निधि उपलब्ध कराने के मुद्दे पर भी राज्य सरकार से बातचीत करने की बात कही। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर इस मामले को हाईकोर्ट तक ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि केवल ‘सारथी’ को प्राथमिकता देकर काम नहीं चलेगा। ‘बार्टी’ और ‘अमृत’ के विद्यार्थियों के साथ होने वाले कथित अन्याय के खिलाफ शासन निर्णय के आधार पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा। अब छात्रों की नजर इस मामले में सरकार और MPSC की अगली भूमिका पर टिकी है।


