नई दिल्ली : ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेजी आने से पेट्रोल-डीजल महंगे हुए और महंगाई बढ़ गई। आम लोग जहां बढ़ती कीमतों से परेशान रहे, वहीं दूसरी ओर दुनिया की बड़ी तेल कंपनियों ने इस संकट के दौर में जबरदस्त मुनाफा कमाया। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल सप्लाई को लेकर बनी चिंता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े। इसका सीधा फायदा दुनिया की बड़ी ऊर्जा कंपनियों को मिला।
बड़ी तेल कंपनियों ने दर्ज किया भारी मुनाफा
सऊदी अरब की दिग्गज तेल कंपनी सऊदी अरामको ने दूसरी तिमाही में करीब 33 अरब डॉलर से ज्यादा का मुनाफा दर्ज किया। वहीं अमेरिका की एक्सॉन मोबिल ने लगभग 14.5 अरब डॉलर का लाभ कमाया, जो कंपनी के लिए हाल के वर्षों के सबसे बड़े तिमाही मुनाफों में से एक रहा। अमेरिकी कंपनी शेवरॉन का मुनाफा भी तेजी से बढ़कर करीब 12 अरब डॉलर तक पहुंच गया। ब्रिटिश ऊर्जा कंपनी शेल ने करीब 10 अरब डॉलर का मुनाफा कमाया। इसके अलावा टोटल एनर्जीज और बीपी जैसी कंपनियों ने भी इस दौरान शानदार कमाई दर्ज की।
महंगाई से जूझती जनता, कंपनियों के मुनाफे पर उठे सवाल
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर दुनियाभर के लोगों पर पड़ा। ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ी और इसका असर खाने-पीने की चीजों से लेकर रोजमर्रा के सामानों की कीमतों तक पहुंचा। ऐसे समय में तेल कंपनियों के रिकॉर्ड मुनाफे को लेकर सवाल उठने लगे कि जब आम जनता महंगाई का सामना कर रही है, तब बड़ी कंपनियां इतनी बड़ी कमाई कैसे कर रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी तेल कंपनियों के बढ़ते मुनाफे पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कंपनियां बहुत ज्यादा पैसा कमा रही हैं और वह इस स्थिति से खुश नहीं हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में अब राहत के संकेत
ईरान और ओमान के बीच बातचीत की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में थोड़ी राहत देखने को मिली है। कच्चे तेल की कीमतें पहले के मुकाबले नीचे आई हैं और बाजार में स्थिरता लौटने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, ईरान संकट ने एक बार फिर साबित कर दिया कि दुनिया के किसी भी हिस्से में होने वाला युद्ध या राजनीतिक तनाव सीधे आम लोगों की जेब पर असर डाल सकता है।


