मंत्रालय में 550 कर्मचारियों पर गिरी गाज, मूल विभाग में भेजे गए अधिकारी-कर्मचारी

मुख्यमंत्री फडणवीस के कार्यालय की सख्त कार्रवाई से मंत्रालय में हलचल, अब नियुक्तियों पर होगी कड़ी निगरानी

मुंबई : मंत्रालय और मंत्रियों के कार्यालयों में बिना तय प्रक्रिया के काम कर रहे करीब 550 अधिकारी और कर्मचारियों को अब उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कार्यालय की ओर से की गई इस कार्रवाई के बाद मंत्रालय में हलचल तेज हो गई है। इन कर्मचारियों में प्रतिनियुक्ति और मौखिक आदेश के आधार पर मंत्रियों के कार्यालयों में तैनात किए गए कर्मचारी भी शामिल हैं।

नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों के कार्यालयों में अस्थायी पदों के लिए एक तय व्यवस्था बनाई गई थी। महायुति सरकार ने मंत्रालयीन कार्यालयों के लिए कुल 904 अस्थायी पदों को मंजूरी दी थी। इनमें 40 मंत्रालयीन कार्यालयों के 549 पद निर्धारित प्रक्रिया के तहत भरे गए थे। हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय की समीक्षा में करीब 550 ऐसे अधिकारी और कर्मचारी सामने आए, जो बिना निर्धारित प्रक्रिया के अलग-अलग माध्यमों से मंत्री कार्यालयों में काम कर रहे थे।

25 अगस्त को जारी हुआ था आदेश

सरकार ने मंत्रालय और मंत्रियों के कार्यालयों में कर्मचारियों की तैनाती में चल रही अनधिकृत और नियमों से हटकर व्यवस्था पर रोक लगाने का फैसला किया था। बिना तय प्रक्रिया के प्रतिनियुक्ति, मौखिक आदेश या बाहरी व्यवस्था के जरिए तैनात किए गए कर्मचारियों को तत्काल उनके मूल विभाग में वापस भेजने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए 10 सितंबर तक की समयसीमा तय की गई थी। आदेश का पालन नहीं करने पर संबंधित कर्मचारियों का वेतन रोकने की चेतावनी भी दी गई थी। पूरी प्रक्रिया पर मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से नजर रखी जा रही थी।

मंत्रियों के कामकाज पर भी असर

550 कर्मचारियों और अधिकारियों की वापसी का सीधा असर अब कई मंत्री कार्यालयों के कामकाज पर दिखाई देने लगा है। चार मंत्रियों के निजी सचिव भी अपने मूल विभाग में वापस चले गए हैं। इस फैसले से कई मंत्रियों के नाराज होने की चर्चा भी है। अब मंत्री कार्यालयों में कर्मचारियों की नियुक्ति केवल निर्धारित प्रक्रिया और जरूरी जांच-पड़ताल के बाद ही की जाएगी। यानी आने वाले समय में मंत्री कार्यालयों में किसे जिम्मेदारी मिलती है, इस पर भी मुख्यमंत्री कार्यालय की निगरानी रहेगी। इस फैसले का असर सिर्फ कर्मचारियों की तैनाती तक सीमित नहीं है। लंबे समय से चल रही अनौपचारिक व्यवस्था पर रोक लगाकर सरकार ने मंत्री कार्यालयों में नियुक्तियों को नियमों के दायरे में लाने का स्पष्ट संकेत दिया है।

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