मुंबई : सरकारी काम करवाने के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है। महाराष्ट्र सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सरल और तेज़ बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने ‘प्रोसेस री-इंजीनियरिंग’ (Process Re-engineering) के तहत पांच अहम बदलाव लागू करने का आदेश जारी किया है। इन बदलावों का उद्देश्य सरकारी सेवाओं को डिजिटल बनाना और नागरिकों की परेशानी कम करना है।
सरकार के अनुसार अब विभिन्न सरकारी विभागों में ऑनलाइन वेरिफिकेशन और डिजिटल वैलिडेशन सिस्टम लागू किया जाएगा। इससे नागरिकों की जानकारी सरकारी डेटाबेस से स्वतः प्राप्त होगी और आवेदन प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगी।इतना ही नहीं, अब कई सेवाओं के लिए नागरिकों को दस्तावेज़ लेकर सरकारी कार्यालय जाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। डिजीलॉकर और एपीआई इंटरऑपरेबिलिटी के जरिए आवश्यक दस्तावेज़ डिजिटल रूप में ही उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार ने फाइलों के निपटारे में होने वाली देरी को रोकने के लिए भी बड़ा कदम उठाया है। अब किसी भी फाइल या निर्णय प्रक्रिया को अधिकतम तीन प्रशासनिक स्तरों तक सीमित रखा जाएगा। इससे अनावश्यक देरी कम होगी और जिम्मेदारियां भी स्पष्ट रहेंगी।
इसके अलावा राइट टू सर्विसेज (सेवा अधिकार) कानून के तहत आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर आवेदन निपटाने का समय भी काफी कम किया जाएगा, जिससे लोगों को सरकारी सेवाएं तय समय में मिल सकेंगी। इन सभी सुधारों की निगरानी मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय जीपीआर अनुमोदन समिति करेगी। वहीं, सरकारी पोर्टल में जरूरी तकनीकी बदलाव और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की जिम्मेदारी महा-आईटी को सौंपी गई है। सरकार का मानना है कि इन नए नियमों के लागू होने से आम नागरिकों की सरकारी कार्यालयों पर निर्भरता कम होगी और अधिकांश सेवाएं घर बैठे ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेंगी।


