भारतीय हॉकी टीम की नई जर्सी को लेकर खेल जगत में विवाद खड़ा हो गया है। टीम की पारंपरिक नीली जर्सी की जगह भगवा रंग की जर्सी इस्तेमाल करने के फैसले पर अब हॉकी इंडिया के अंदर से ही सवाल उठने लगे हैं। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष और पूर्व कप्तान दिलीप तिर्की ने दावा किया है कि यह फैसला उनकी जानकारी और कार्यकारिणी की मंजूरी के बिना लिया गया।
आगामी हॉकी वर्ल्ड कप को देखते हुए टीम की जर्सी में बदलाव किया गया, लेकिन जैसे ही भगवा रंग की जर्सी सामने आई, सोशल मीडिया से लेकर खेल जगत तक इस पर चर्चा शुरू हो गई। कई पूर्व खिलाड़ियों और हॉकी प्रेमियों ने कहा कि भारतीय हॉकी की पहचान लंबे समय से नीले रंग से जुड़ी रही है। पूर्व भारतीय कप्तान और ओलंपियन विरेन रसकिन्हा सहित कई लोगों ने इस बदलाव पर अपनी नाराजगी जताई। वहीं, ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि हॉकी भारत की गौरवशाली परंपरा और पहचान से जुड़ा खेल है।
दिलीप तिर्की ने ई-मेल से मांगा जवाब
विवाद बढ़ने के बाद हॉकी इंडिया अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने वरिष्ठ अधिकारियों और कार्यकारिणी सदस्यों को ई-मेल भेजकर इस फैसले पर स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने कहा कि उन्हें जर्सी का रंग बदलने की प्रक्रिया की जानकारी नहीं दी गई थी। तिर्की ने अपने मेल में साफ किया कि उन्हें भगवा रंग से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन राष्ट्रीय टीम की पहचान से जुड़े इतने बड़े फैसले में चुने गए नेतृत्व और कार्यकारिणी से चर्चा होना जरूरी था। उन्होंने अधिकारियों से यह भी पूछा कि जर्सी बदलने का निर्णय किस प्रक्रिया के तहत लिया गया, किसकी मंजूरी से इसे लागू किया गया और इसके पीछे क्या कारण थे।
अब जवाब का इंतजार
जर्सी विवाद ने हॉकी इंडिया की निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर टीम वर्ल्ड कप की तैयारियों में जुटी है, वहीं दूसरी ओर जर्सी को लेकर उठे विवाद ने नया मुद्दा खड़ा कर दिया है। अब सभी की नजर हॉकी इंडिया के अधिकारियों के जवाब पर है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जर्सी बदलने के फैसले के पीछे की पूरी प्रक्रिया क्या थी और आगे इस विवादावर काय तोडगा निघतो.


