मोकी (चीन)। भारतीय हॉकी के लिए रविवार का दिन बेहद खास रहा। जूनियर महिला और पुरुष, दोनों भारतीय हॉकी टीमों ने एशियाई करंडक अपने नाम कर देश को एक साथ दोहरी खुशी दी। महिला टीम ने फाइनल में चीन को 1-0 से हराया, जबकि पुरुष टीम ने दक्षिण कोरिया को 4-1 से मात देकर खिताब पर कब्जा जमाया। खास बात यह रही कि दोनों टीमों ने लगातार तीसरी बार इस प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम किया। इसके साथ ही दोनों टीमों ने जूनियर हॉकी विश्व कप के लिए भी अपनी जगह पक्की कर ली।
सानिका का गोल बना जीत की वजह
महिला टीम के फाइनल में भारत और चीन के बीच शुरुआत से ही कड़ा मुकाबला देखने को मिला। चीन ने गेंद पर ज्यादा कब्जा रखते हुए भारतीय टीम पर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन भारतीय डिफेंस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्हें गोल का साफ मौका नहीं दिया। पहला क्वार्टर गोलरहित रहा। दूसरे क्वार्टर के 17वें मिनट में महाराष्ट्र की सानिका चंद्रकांत माने ने शानदार गोल कर भारत को 1-0 की बढ़त दिलाई। सानिका ने चीन की डिफेंस लाइन के पीछे जगह बनाई और मिले पास पर खूबसूरत डिफ्लेक्शन करते हुए गेंद को गोल में पहुंचा दिया।
इसके बाद चीन ने बराबरी के लिए काफी कोशिश की, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने आखिरी तक अपनी रक्षापंक्ति मजबूत रखी। गोल के सामने आए खतरनाक पास को भी भारतीय डिफेंडरों ने समय रहते रोक दिया। आखिरकार भारत ने 1-0 से मुकाबला जीतकर खिताब अपने पास बरकरार रखा। सानिका का यह गोल सिर्फ जीत का कारण नहीं बना, बल्कि भारतीय टीम को जूनियर महिला विश्व कप की पात्रता दिलाने में भी अहम साबित हुआ। टीम की इस शानदार सफलता पर हॉकी इंडिया ने हर खिलाड़ी को 3 लाख रुपये और सपोर्ट स्टाफ के प्रत्येक सदस्य को 1.5 लाख रुपये पुरस्कार देने की घोषणा की।
पुरुष टीम ने दक्षिण कोरिया को 4-1 से हराया
पुरुषों के फाइनल में भारतीय टीम ने शुरू से ही आक्रामक खेल दिखाया। दक्षिण कोरिया के खिलाफ भारत ने 4-1 की शानदार जीत दर्ज की। अजित यादव ने 9वें मिनट में गोल कर टीम को बढ़त दिलाई। इसके बाद अनमोल इक्का ने 13वें मिनट में दूसरा गोल किया। तीसरे क्वार्टर में प्रभदीप सिंह ने 21वें मिनट में गोल कर भारत की बढ़त और मजबूत कर दी। मैच के 50वें मिनट में आशू मौर्या ने चौथा गोल दागकर भारतीय जीत लगभग तय कर दी। दक्षिण कोरिया की ओर से एक गोल किया गया, लेकिन भारतीय टीम ने मुकाबला 4-1 से अपने नाम कर लिया।
यह भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम का इस प्रतियोगिता में छठा खिताब है। लगातार तीसरी बार चैंपियन बनने के साथ पुरुष टीम ने भी जूनियर विश्व कप का टिकट हासिल कर लिया। भारत के लिए यह सिर्फ दो ट्रॉफी जीतने की कहानी नहीं है। एक ही दिन महिला और पुरुष दोनों जूनियर टीमों का एशियाई चैंपियन बनना भारतीय हॉकी के लिए उम्मीद और गर्व का पल है। मैदान पर खिलाड़ियों की मेहनत ने एक बार फिर दिखा दिया कि भारतीय हॉकी का भविष्य मजबूत हाथों में है।


