नई दिल्ली : 8वें वेतन आयोग को लेकर लंबे समय से इंतजार कर रहे करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों के लिए संसद से एक अहम अपडेट सामने आया है। फिटमेंट फैक्टर को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने पहली बार अपनी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की है। सरकार ने साफ कहा है कि 8वां वेतन आयोग एक स्वतंत्र संस्था है और उसके कामकाज में सरकार सीधे हस्तक्षेप नहीं करती।
राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि आयोग को अपनी बैठकों, कर्मचारी संगठनों के साथ हुई चर्चाओं या फिटमेंट फैक्टर जैसे विचाराधीन प्रस्तावों की जानकारी सरकार को देना अनिवार्य नहीं है। आयोग अपनी तय कार्य-सीमा के अनुसार स्वतंत्र रूप से काम करता है और अंतिम रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा। दरअसल, कर्मचारी संगठनों की ओर से फिटमेंट फैक्टर को लेकर लगातार मांग की जा रही है। मौजूदा 7वें वेतन आयोग में यह 2.57 तय किया गया था, जबकि अब इसे बढ़ाकर 3.83 करने की मांग उठ रही है। यदि यह मांग स्वीकार होती है, तो कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन 18 हजार रुपये से बढ़कर करीब 69 हजार रुपये तक पहुंच सकता है।
इसके अलावा कर्मचारी संगठन वेतन निर्धारण में इस्तेमाल होने वाले ‘फैमिली यूनिट’ के आकार को तीन सदस्यों से बढ़ाकर पांच सदस्य करने की भी मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इसमें कर्मचारियों के माता-पिता को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक पारिवारिक खर्चों का बेहतर आकलन हो सके। हालांकि, सरकार ने इन मांगों पर कोई सीधी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। सरकार का कहना है कि आयोग की रिपोर्ट आने से पहले किसी भी प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देना उचित नहीं होगा।
सरकार ने यह भी बताया कि 3 नवंबर 2025 को जारी अधिसूचना के अनुसार, 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को गठन के 18 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करनी हैं। फिलहाल इस समय-सीमा में किसी बदलाव की घोषणा नहीं की गई है। अब केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों की नजर आयोग की अंतिम सिफारिशों पर टिकी है। फिटमेंट फैक्टर और वेतन वृद्धि को लेकर अंतिम फैसला आयोग की रिपोर्ट और उसके बाद सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा।


