NSE IPO : नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित आईपीओ का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। 16 सितंबर से आईपीओ रिटेल निवेशकों के लिए खुलने वाला है। इसी बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि NSE के शेयर आखिर लिस्ट कहां होंगे? क्या NSE अपने ही प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होगा? कंपनी के CEO आशीष कुमार चौहान ने इस सवाल का जवाब दिया है।
CNBC TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, आशीष कुमार चौहान ने बताया कि NSE ने सेबी के पास अपने ही प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग की अनुमति के लिए कोई आवेदन नहीं किया है। ऐसे में NSE की लिस्टिंग BSE पर होने की संभावना है।
₹200 के पार पहुंचा GMP
NSE IPO को लेकर ग्रे मार्केट में भी हलचल बनी हुई है। इन्वेस्टर्स गेन के अनुसार, NSE का आईपीओ ग्रे मार्केट में फिलहाल 217 रुपये के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। यह करीब 12 प्रतिशत के संभावित लिस्टिंग गेन का संकेत दे रहा है। हालांकि, GMP अनौपचारिक बाजार का संकेत है और इसमें बदलाव हो सकता है।
क्या है NSE IPO का प्राइस बैंड?
NSE ने आईपीओ के लिए 1,700 रुपये से 1,785 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। इस हिसाब से कंपनी आईपीओ के जरिए करीब 21,494 करोड़ रुपये से 22,569 करोड़ रुपये जुटा सकती है। पहले NSE के आईपीओ का आकार करीब 30,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया जा रहा था। वहीं, अनुमानित वैल्यूएशन भी करीब 5 लाख करोड़ रुपये से घटकर लगभग 4.2 लाख करोड़ रुपये रह गया है।
SBI समेत इन शेयरधारकों ने घटाई हिस्सेदारी बिक्री
आईपीओ में कुछ मौजूदा शेयरधारकों ने अपनी प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री कम कर दी है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) अब 2.47 करोड़ की जगह 1.6 करोड़ शेयर बेचेगा। वहीं MS Strategic (Mauritius) Limited 1.6 करोड़ की जगह 1.1 करोड़ शेयरों की बिक्री करेगी। इसके अलावा Bank of Baroda ने प्रस्तावित बिक्री 1.09 करोड़ से घटाकर 76.9 लाख शेयर कर दी है। Stock Holding Corporation of India Limited ने भी 1.08 करोड़ से घटाकर 61.87 लाख शेयर करने का फैसला किया है।
NSE की वित्तीय स्थिति कैसी है?
वित्त वर्ष 2026 में NSE को 10,300 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट हुआ था। हालांकि, पिछले साल के मुकाबले इसमें करीब 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, 2019 से अप्रैल 2026 के बीच NSE का रेवेन्यू दोगुना हो चुका है। अब प्राइस बैंड, GMP और लिस्टिंग को लेकर निवेशकों की नजर NSE IPO पर टिकी हुई है। हालांकि, आईपीओ में निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, वैल्यूएशन और जोखिमों को समझना जरूरी है।


