कोलकाता : भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की मौजूदगी में रविवार को कोलकाता स्थित GRSE भवन से Garden Reach Shipbuilders & Engineers Limited (GRSE) के तीन और Yantra India Limited (YIL) के दो विस्तार प्रोजेक्ट्स का वर्चुअल भूमिपूजन किया गया। करीब 3,500 करोड़ रुपये की लागत वाले इन प्रोजेक्ट्स से देश की जहाज निर्माण, जहाज मरम्मत, धातु उत्पादन और रक्षा उपकरण निर्माण क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
इन प्रोजेक्ट्स का असर सिर्फ रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। इनके जरिए हजारों लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनने के साथ ही MSME और सहायक उद्योगों को भी काम के नए अवसर मिलेंगे। ऐसे में इन परियोजनाओं को पश्चिम बंगाल के औद्योगिक विकास के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन पर जोर
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश अब रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्वदेशी हथियारों और रक्षा प्लेटफॉर्म की अहमियत बताई। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता सिर्फ एक नीति नहीं, बल्कि युद्धभूमि पर भारत की क्षमता को कई गुना बढ़ाने वाली ताकत है। उन्होंने GRSE की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया कि कंपनी अब तक 800 से अधिक जहाजों का निर्माण कर चुकी है। वहीं, निर्माणाधीन अगली पीढ़ी के Offshore Patrol Vessels में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री इस्तेमाल होने की बात भी कही गई।
जहाज निर्माण में भारत के लिए बड़ा मौका
राजनाथ सिंह ने वैश्विक जहाज निर्माण क्षेत्र में घटती क्षमता और बढ़ती मांग को भारत के लिए बड़ी संभावना बताया। उनके मुताबिक कई पारंपरिक जहाज निर्माण देश अब बढ़ती लागत और कुशल श्रमिकों की कमी के कारण इस क्षेत्र से पीछे हट रहे हैं। ऐसे समय में भारत के पास कुशल इंजीनियर, IT विशेषज्ञ, मजबूत स्टील उद्योग और MSME नेटवर्क मौजूद है।
उन्होंने कहा कि भारत को सिर्फ जहाज बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि डिजाइन, निर्माण और MRO यानी Maintenance, Repair and Overhaul के क्षेत्र में भी वैश्विक पहचान बनानी चाहिए। हिंद महासागर क्षेत्र में जहाजों की मरम्मत और ओवरहॉल का बड़ा केंद्र बनने से भारत को विदेशी मुद्रा बचाने के साथ रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं।
रायचक में बनेगा बड़ा जहाज निर्माण केंद्र
GRSE के रायचक प्रोजेक्ट पर करीब 2,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। 32 एकड़ में विकसित होने वाली इस सुविधा में 200 मीटर तक लंबे युद्धपोत और 60 हजार टन तक के वाणिज्यिक जहाज बनाए जा सकेंगे। यहां 200 मीटर लंबा Dry Dock, Slipway और Ship Launching Pad के साथ दो जेट्टी और जहाजों के निर्माण व मरम्मत से जुड़ी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे GRSE की भविष्य की बड़ी युद्धपोत परियोजनाओं में भागीदारी की क्षमता भी बढ़ेगी।
इसके अलावा हावड़ा के Timber Pond में करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से मध्यम आकार के जहाजों के निर्माण और मरम्मत की सुविधा विकसित की जाएगी। किडरपूर के Damodar प्रोजेक्ट में करीब 70 करोड़ रुपये निवेश कर मध्यम आकार के जहाजों की मरम्मत के साथ इलेक्ट्रिक फेरी और छोटे जलयानों के निर्माण की योजना है।
YIL में आधुनिक फोर्जिंग सुविधाएं
YIL के इशापूर स्थित Metal and Steel Factory में दो अत्याधुनिक प्रोजेक्ट्स पर 750 करोड़ रुपये से अधिक निवेश किया जाएगा। इनमें 3,000 टन क्षमता वाला Heavy Duty Hydraulic Open Die Forging Press और Radial Forging Plant शामिल हैं। नया 3,000 टन का प्रेस 1976 से इस्तेमाल हो रहे पुराने 2,650 टन प्रेस की जगह लेगा। इससे बंदूक की नलियों, गोला-बारूद के घटकों और अन्य भारी रक्षा उपकरणों के लिए जरूरी फोर्जिंग का उत्पादन अधिक सटीकता और आधुनिक तकनीक के साथ किया जा सकेगा।
वहीं, करीब 473.84 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले Radial Forging Plant में Super Alloy Forgings, एरियल बमों के लिए Hollow Tubes, रेलवे Axles और परमाणु क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण घटकों का उत्पादन किया जा सकेगा। यह सुविधा Industry 4.0 तकनीक पर आधारित होगी।
‘दुनिया भारत से क्या खरीदे’ पर हो फोकस
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का नजरिया अब सिर्फ यह सोचने तक सीमित नहीं होना चाहिए कि देश को दुनिया से क्या खरीदना है, बल्कि यह होना चाहिए कि दुनिया भारत से क्या खरीदना चाहती है। उन्होंने GRSE को अपनी बढ़ती क्षमता का पूरा इस्तेमाल करते हुए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की सलाह दी। उनके अनुसार बेहतर गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धी कीमत और समय पर डिलीवरी के जरिए भारत को वैश्विक बाजार में एक भरोसेमंद रक्षा और जहाज निर्माण साझेदार के रूप में स्थापित किया जा सकता है।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इन परियोजनाओं के भूमिपूजन को राज्य के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इन विस्तार परियोजनाओं से GRSE और YIL की क्षमता बढ़ने के साथ ही रोजगार और MSME क्षेत्र को भी नई गति मिलेगी।


