सिंधु का पानी, भारत का बाजार! पाकिस्तान अब भारत को चीनी बेचने की तैयारी में

12 लाख टन अतिरिक्त चीनी का भंडार, 600 मिलियन डॉलर कमाने की उम्मीद

नई दिल्ली : भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के बीच अब चीनी को लेकर एक दिलचस्प विरोधाभास सामने आया है। पाकिस्तान में चीनी का बड़ा अतिरिक्त भंडार जमा है और इसे भारत में निर्यात करने की अनुमति देने की मांग पाकिस्तान शुगर मिल्स एसोसिएशन (PSMA) ने अपनी सरकार से की है। भारत की ओर से करीब एक दशक बाद चीनी आयात के संकेत मिलने के बाद पाकिस्तान का चीनी उद्योग इसे बड़ी आर्थिक संभावना के रूप में देख रहा है।

पाकिस्तान में फिलहाल बीट शुगर समेत करीब 79.58 लाख मीट्रिक टन चीनी उपलब्ध बताई जा रही है। वहीं देश की घरेलू जरूरत करीब 66.38 लाख मीट्रिक टन है। ऐसे में नए गन्ना पेराई सत्र से पहले पाकिस्तान के पास 12 लाख टन से ज्यादा चीनी अतिरिक्त बचने की संभावना है। इस अतिरिक्त स्टॉक को समय रहते बाजार से बाहर नहीं निकाला गया तो पाकिस्तान के चीनी उद्योग पर आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका है। इसी वजह से PSMA ने सरकार से भारत को चीनी निर्यात करने की अनुमति देने की मांग की है। इस सौदे से पाकिस्तान को करीब 600 मिलियन डॉलर यानी लगभग 5 हजार करोड़ रुपये की कमाई होने की उम्मीद जताई जा रही है।

भारत की जरूरत, पाकिस्तान का फायदा

भारत की ओर से चीनी आयात के संकेत मिलते ही पाकिस्तान के चीनी उद्योग ने इस मौके को भुनाने की कोशिश शुरू कर दी है। एक तरफ दोनों देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव जारी है, वहीं दूसरी ओर आर्थिक जरूरत पाकिस्तान को भारतीय बाजार की ओर देखने के लिए मजबूर कर रही है। भारत की आलोचना करने वाले पाकिस्तान के चीनी उद्योग के लिए अब भारतीय बाजार अपने अतिरिक्त स्टॉक को खपाने का संभावित रास्ता बन गया है। यही वजह है कि इस पूरे मामले को दोनों देशों के संबंधों में एक बड़े विरोधाभास के तौर पर देखा जा रहा है।

सिंधु के पानी पर भी उठे सवाल

इस मामले का सबसे अहम पहलू सिंधु नदी के पानी से जुड़ा है। पाकिस्तान की खेती बड़े पैमाने पर सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है और गन्ना ऐसी फसल है, जिसमें काफी मात्रा में पानी की जरूरत होती है। एक ओर पाकिस्तान सिंधु जल समझौते को लेकर भारत पर पानी रोकने के आरोप लगाता रहा है, वहीं दूसरी ओर उसी नदी के पानी से उगाए गए गन्ने से बनी चीनी को भारत में बेचने की उम्मीद रख रहा है। इसी विरोधाभास को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि जिस पानी को लेकर पाकिस्तान भारत पर सवाल उठाता है, उसी पानी से तैयार कृषि उत्पाद के लिए भारतीय बाजार की ओर क्यों देखा जा रहा है?

हालांकि, पाकिस्तान से भारत में चीनी का वास्तविक आयात होगा या नहीं, यह भारत सरकार के फैसले और दोनों देशों के बीच व्यापारिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल पाकिस्तान की यह मांग सामने आने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार और कूटनीति को लेकर एक नई चर्चा जरूर शुरू हो गई है।

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