अहिल्यानगर : पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी के वक्तव्य को लेकर अहिल्यानगर के रवींद्र मुळे ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कार्यक्रम को केवल राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि एक व्यापक वैचारिक संघर्ष का हिस्सा बताया। मुळे ने राहुल गांधी और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव का जिक्र करते हुए किसान आंदोलन, शाहीन बाग और अन्य आंदोलनों का संदर्भ दिया। उनका आरोप है कि विभिन्न मुद्दों के जरिए युवाओं में सरकार और संस्थाओं के प्रति असंतोष बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
महिलाओं और युवाओं का मुद्दा भी उठाया
मुळे ने भारतीय परंपरा में महिलाओं की भूमिका का उल्लेख करते हुए गार्गी, मैत्रेयी, अहिल्यादेवी होलकर, रानी ताराबाई, रानी लक्ष्मीबाई और जीजाबाई जैसी महिलाओं का उदाहरण दिया। मनुस्मृति और महिला स्वतंत्रता को लेकर होने वाली राजनीतिक बहस पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल आंदोलनों की ओर आकर्षित करने के बजाय शिक्षा, कौशल और विकास के अवसर देना जरूरी है। साथ ही, राजनीतिक नेतृत्व को भी समाज के साथ संवाद बढ़ाने और जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत है। मुळे ने अंत में कहा कि “राजनीतिक सत्ता समाज का केवल एक हिस्सा है, समाज सर्वोपरि है।” उन्होंने भारतीय समाज से अपने मूल्यों और विचारधारा के प्रति सजग रहने की अपील की


