नागपुर : नागपुर की ऐतिहासिक और पारंपरिक धार्मिक परंपराओं में विशेष स्थान रखने वाले मस्कऱ्या (हडपक्या) गणपति का आगमन इस वर्ष 27 सितंबर को होने जा रहा है। इस परंपरा को 239 वर्ष पूरे हो रहे हैं। गणपति का आगमन जुलूस 27 सितंबर को शाम 6 बजे निकलेगा, जबकि गणपति की स्थापना 29 सितंबर को की जाएगी।
मस्कऱ्या गणपति की परंपरा का इतिहास वर्ष 1787 से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि श्रीमंत राजे खंडोजी महाराज भोंसले (उर्फ चिमणाबापू) ने इस उत्सव की शुरुआत की थी। बंगाल की स्वारी से विजय प्राप्त कर लौटते समय उन्होंने इस विजय की खुशी को सार्वजनिक रूप से मनाने के लिए मस्कऱ्या (हडपक्या) गणपति की स्थापना की थी। इस दौरान विभिन्न नकला और खड़ी गंमत जैसे कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया था।
समय के साथ यह परंपरा आगे बढ़ती गई और आज भी पितृपक्ष में मस्कऱ्या गणपति का उत्सव आयोजित किया जाता है। प्रेस नोट के अनुसार, लोकमान्य टिळक ने भी अन्याय के खिलाफ संघर्ष और सार्वजनिक एकजुटता की इसी भावना का अध्ययन करते हुए गणपति उत्सव को सार्वजनिक स्वरूप देने की दिशा में काम किया।
18 हाथ की प्रतिमा की परंपरा
श्रीमंत राजे खंडोजी महाराज के समय मस्कऱ्या गणपति की 18 हाथ और 21 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित किए जाने की परंपरा थी। इसी परंपरा को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष 18 हाथ की 7 फीट की गणेश प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इस गणपति को भक्तों के बीच नवसाला पावणारा गणपति यानी मनोकामना पूरी करने वाले गणपति के रूप में विशेष मान्यता प्राप्त है। आयोजकों के अनुसार, आज भी कई भक्तों को इस गणपति के प्रति आस्था और प्रचिती का अनुभव होता है।
इन रास्तों से गुजरेगी आगमन मिरवणूक
27 सितंबर को शाम 6 बजे सी.पी. एंड बेरार महाविद्यालय, तुळशीबाग से गणपति की आगमन मिरवणूक शुरू होगी। जुलूस ज्युनियर भोंसला पैलेस, राजे प्रतापसिंह भोंसले चौक (सुतिका गृह), कोतवाली पुलिस स्टेशन चौक और नरसिंग टॉकीज चौक से होते हुए सिनियर भोंसला पैलेस पहुंचेगा। इस ऐतिहासिक परंपरा को देखने के लिए श्रद्धालुओं में भी उत्सुकता है। महाराजा ऑफ नागपुर ट्रस्ट की ओर से पत्रकारों, छायाकारों और दूरचित्रवाणी प्रतिनिधियों को उत्सव के विभिन्न कार्यक्रमों में आमंत्रित किया गया है।


