नागपुर : राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय ने शिक्षा के क्षेत्र में 103 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पूरी कर ली है। बदलते समय की जरूरतों को देखते हुए अब विश्वविद्यालयों को केवल शिक्षा तक सीमित न रहते हुए शोध, कौशल विकास और समाज उपयोगी कार्यों के माध्यम से ‘विकसित भारत@2047’ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। यह बात महाराष्ट्र पशु एवं मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. नितीन पाटील ने कही।
राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के 103वें स्थापना दिवस समारोह का आयोजन मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को अंबाझरी मार्ग स्थित गुरुनानक भवन में किया गया। समारोह में डॉ. नितीन पाटील मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर ने की। डॉ. नितीन पाटील ने कहा कि किसी भी संस्था के लिए 103 वर्षों की यात्रा गौरव और जिम्मेदारी दोनों का प्रतीक होती है। विश्वविद्यालय ने विदर्भ ही नहीं बल्कि मध्य भारत में शिक्षा का मजबूत आधार तैयार किया है। अब बदलते दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जैवतंत्रज्ञान, डिजिटल तकनीक और पर्यावरणीय बदलाव जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में नए प्रयोग करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुसार कौशल आधारित शिक्षा देना जरूरी है। विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों को नए अवसरों से जोड़ने के साथ-साथ समाज की समस्याओं के समाधान के लिए शोध कार्यों को बढ़ावा देना चाहिए। राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय और महाराष्ट्र पशु एवं मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय मिलकर शोध और सामाजिक विकास के क्षेत्र में काम करें, तो विदर्भ के विकास को नई दिशा मिल सकती है।
शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों में सहयोग की भावना विकसित करें : डॉ. मनाली क्षीरसागर
कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर ने कहा कि राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज ने ग्रामगीता के माध्यम से शिक्षा, समाज सेवा और सहयोग का संदेश दिया। विद्यार्थियों में सहयोग, जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करना शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप कौशल आधारित और रोजगार केंद्रित पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ उद्योगों में प्रशिक्षण और अप्रेंटिसशिप के माध्यम से व्यावहारिक अनुभव देने पर भी जोर दिया जा रहा है।
समाज सेवा के लिए डॉ. भाऊसाहेब भोगे सम्मानित
स्थापना दिवस समारोह में वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. भाऊसाहेब लहानुजी भोगे को उनके उल्लेखनीय सामाजिक कार्यों के लिए ‘राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज जीवन साधना पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए किए गए उनके कार्यों की सराहना की गई। विधायक डॉ. आशिष देशमुख ने कहा कि डॉ. भाऊसाहेब भोगे का जीवन समाज सेवा को समर्पित रहा है। उन्हें मिला सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि विदर्भ के जरूरतमंद लोगों के संघर्ष और सेवा भावना का सम्मान है।
उत्कृष्ट कार्य करने वालों का सम्मान
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की ओर से प्रकाशित ‘विश्वविद्यालय मार्गदर्शिका’ पुस्तक का विमोचन किया गया। इसके साथ ही उत्कृष्ट अधिकारी, शिक्षकेतर कर्मचारी, विद्यार्थी, एनसीसी कैडेट और राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) स्वयंसेवकों को पुरस्कार प्रदान किए गए। समारोह में प्र-कुलगुरु डॉ. अखिलेश पेशवे, प्रभारी कुलसचिव डॉ. विजय खंडाळ, विधायक डॉ. आशिष देशमुख, विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
नई पीढ़ी को दिशा देने का संकल्प
103 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा पूरी करने वाला राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय अब आधुनिक शिक्षा, कौशल विकास और शोध के माध्यम से नई पीढ़ी को तैयार करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। स्थापना दिवस समारोह ने इसी नई सोच और भविष्य की दिशा को उजागर किया।


