सुरों की जादुई शाम से सजा नागपुर, 33वें डॉ. वसंतराव देशपांडे स्मृति संगीत समारोह का भव्य आगाज़

पद्मश्री शुभा मुदगल की सुरीली प्रस्तुति और निलाद्री कुमार के सितार वादन ने बांधा समां, पहले दिन उमड़े संगीत प्रेमी

नागपुर :  शास्त्रीय संगीत की मधुर स्वर लहरियों से बुधवार की शाम नागपुर पूरी तरह संगीत के रंग में रंग गई। दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) की ओर से आयोजित 33वें डॉ. वसंतराव देशपांडे स्मृति संगीत समारोह का भव्य शुभारंभ 29 जुलाई को हुआ। कार्यक्रम में शहर के संगीत प्रेमियों की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने इस आयोजन को यादगार बना दिया।

समारोह का उद्घाटन नागपुर के पुलिस आयुक्त विश्वास नागरे पाटिल, सुप्रसिद्ध शेफ विष्णु मनोहर, पद्मश्री गायिका शुभा मुदगल और दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की निदेशक आस्था कार्लेकर ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर अतिथियों का शॉल, स्मृति चिन्ह और पौधा भेंट कर सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पद्मश्री शुभा मुदगल के शास्त्रीय गायन से हुई। उन्होंने राग मधुवंती की मनमोहक प्रस्तुति से श्रोताओं को सुरों की दुनिया में पहुंचा दिया। इसके बाद दादरा और झूला शैली की रचनाओं ने पूरे सभागार में संगीत का अलग ही रंग बिखेर दिया। उनकी प्रस्तुति को तबला, संवादिनी और तानपुरे की सधी हुई संगत ने और भी प्रभावशाली बना दिया।

इसके बाद मंच पर प्रसिद्ध सितार वादक निलाद्री कुमार ने अपनी प्रस्तुति से समां बांध दिया। राग जय जयवंती से शुरू हुआ उनका सितार वादन राग भैरवी तक पहुंचते-पहुंचते श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर गया। तबले पर सत्यजीत तलवलकर की संगत ने प्रस्तुति में चार चांद लगा दिए। पहले दिन समारोह में बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी मौजूद रहे और कलाकारों की हर प्रस्तुति पर तालियों की गूंज सुनाई दी। पूरे आयोजन में भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा और उसकी खूबसूरती देखने को मिली।

आज होगा मराठी संगीत नाटक ‘देवबाभळी’ का मंचन

समारोह के दूसरे दिन यानी 30 जुलाई को भद्रकाली प्रोडक्शन्स, मुंबई द्वारा चर्चित मराठी संगीत नाटक ‘देवबाभळी’ का मंचन किया जाएगा। 800 से अधिक सफल प्रयोग कर चुका यह नाटक पारंपरिक अभंग और आधुनिक रंगमंच का अनूठा संगम माना जाता है। इस नाटक को अब तक 44 पुरस्कार मिल चुके हैं।

समापन दिवस पर रोनू मजूमदार और डॉ. भरत बलवल्ली की प्रस्तुति

31 जुलाई को समारोह के अंतिम दिन पद्मश्री पंडित रोनू मजूमदार अपनी मनमोहक बांसुरी वादन से श्रोताओं को संगीत की नई अनुभूति कराएंगे। वहीं समापन प्रस्तुति में स्वराधीश डॉ. भरत बलवल्ली शास्त्रीय गायन पेश करेंगे। दोनों ही कलाकार भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत के प्रतिष्ठित नाम हैं और उनकी प्रस्तुति को लेकर संगीत प्रेमियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।Hashtags

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