मुंबई : महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी परिपत्र के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। ये नियम राज्य सरकार के स्थायी कर्मचारियों के साथ-साथ संविदा, आउटसोर्स कर्मचारियों और स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं, मंडलों एवं महामंडलों में कार्यरत कर्मचारियों पर भी लागू होंगे।
नई गाइडलाइन के मुताबिक, सरकारी कर्मचारी केंद्र या राज्य सरकार की नीतियों, फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से आलोचनात्मक टिप्पणी नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा किसी भी तरह की आपत्तिजनक, भड़काऊ, मानहानिकारक या समाज में वैमनस्य फैलाने वाली पोस्ट, कमेंट, शेयर या फॉरवर्ड करने पर भी रोक लगाई गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों को अपने निजी और आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पूरी तरह अलग रखने होंगे। निजी अकाउंट पर सरकारी पदनाम, विभाग का लोगो, वर्दी, सरकारी वाहन या सरकारी इमारतों के साथ रील, फोटो या वीडियो साझा करने की अनुमति नहीं होगी।
सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना कोई भी गोपनीय दस्तावेज, सरकारी फाइल या संवेदनशील जानकारी सोशल मीडिया पर साझा नहीं की जा सकती। साथ ही, सरकारी कार्यों से जुड़ी पोस्ट के जरिए स्वयं का प्रचार-प्रसार करने से भी कर्मचारियों को बचने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार और कार्यालयीन समन्वय के लिए व्हाट्सऐप और टेलीग्राम जैसे अधिकृत मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा सकेगा। वहीं, केंद्र या राज्य सरकार द्वारा प्रतिबंधित किसी भी वेबसाइट या ऐप के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक रहेगी।
सरकार ने साफ किया है कि ‘महाराष्ट्र सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1979’ सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर भी लागू होंगे। यदि कोई कर्मचारी इन नियमों या जारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ ‘महाराष्ट्र सिविल सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1979’ के तहत कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

